Saturday, August 6, 2011

छह लाख गांवों तक और छह हजार जातियों के नेटवर्किंग से रा।ट्रीय राष्ट्रीय जन आंदोलन निर्माण मूलनिवासी बहुजनों की आजादी के लिए फौरी जरुरत, बामसेफ अध्यक्ष ने किय कोलकाता में बंगाल के कार्यकर्ताओं का प्रबोधन।

29th sep. programme park circus, छह लाख गांवों तक और छह हजार जातियों के नेटवर्किंग से रा।ट्रीय राष्ट्रीय जन आंदोलन निर्माण मूलनिवासी बहुजनों की आजादी के लिए फौरी जरुरत, बामसेफ अध्यक्ष ने किय कोलकाता में बंगाल के कार्यकर्ताओं का प्रबोधन।


छह लाख गांवों तक और छह हजार जातियों के नेटवर्किंग से रा।ट्रीय राष्ट्रीय जन आंदोलन निर्माण मूलनिवासी बहुजनों की आजादी के लिए फौरी जरुरत, बामसेफ अध्यक्ष ने किय कोलकाता में बंगाल के कार्यकर्ताओं का प्रबोधन।


छह लाख गांवों तक और छह हजार जातियों के नेटवर्किंग से रा।ट्रीय राष्ट्रीय जन आंदोलन निर्माण मूलनिवासी बहुजनों की आजादी के लिए फौरी जरुरत, बामसेफ अध्यक्ष ने किय कोलकाता में बंगाल के कार्यकर्ताओं का प्रबोधन।

२९ जुलाई को कोलकाता के पार्क सर्कस अंबेडकर भवन में बंगाल के बामसेफ, भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय मूल निवासी   संघ के सक्रिय कार्यकर्ताओं का एक दिवसीय पबोधन संपन्न हुआ।

माननीय वामन मेश्राम जी ने सभी समस्याओं की जड़ ब्राह्मणवादी व्यवस्था का खुलासा करते हुए सभी समस्याओं के समाधान के लिए गूलामी से से आजादी के लिए राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन की अनिवार्यता बतायी और इसके लिए देश के सभी छह लाख गांवों तक भौगोलिक नेटवर्किंग और छह हजार जातियों की सामाजिक नेटवर्किंग की रणनीति विस्तार से समझायी। इसके लिए सभी काॆयकर्ताओं के कालबद्ध दायित्व तय कर दिये गये।

इस प्रबोधन कार्यक्रम में राजनीतिक सामाजिक परिदृश्य की भी विस्तार से चर्चा हुई। इस अवसर पर लगभग सभी जिलों से प्रतिनिधित्व दर्ज हुई। वंगाल में इस वक्त अनुमंडल स्तर तक संगठन का विस्तार हुआ है। पिछले राष्ट्रीय सम्मेलन के बाद बंगाल में मूलनिवासी आंदोलन तेज हुआ है।

पहली सितंबर को नई दिल्ली में भारत मुक्ति मोर्चा की विशाल रैली की तैयारियों पर भी चर्चा हुई।

प्रबोधन का सिलसिला जारी रहेगा।


---------- Forwarded message ----------
From: Vijay Singh <vijayksbmm@yahoo.com>
Date: Fri, Jul 29, 2011 at 11:32 PM
Subject: 29th sep. programme park circus
To: Palash Biswas <palashbiswaskl@gmail.com>, mulnivasibharat <mulnivasibharat@gmai.com>

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