Thursday, April 25, 2013

चिटफंड सुनामी की चपेट में पूरा देश, चिदंबरम की पत्नी का भी नाम। खुल्ला खेल फर्रूखाबादी सेक्स, ग्लैमर और राजनीति का।

चिटफंड सुनामी की चपेट में पूरा देश, चिदंबरम की पत्नी का भी नाम। खुल्ला खेल फर्रूखाबादी सेक्स, ग्लैमर और राजनीति का।


एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​


बागी तृणमूल सांसद कबीर सुमन  ने मुख्यमंत्री ममत बनर्जी के मंतव्य जो हुआ, सो हुआ, शांत रहे - को थीम बनाकर अपना ताजा गीत रचा है।शारदा ग्रुप के चिट फंड घोटाले की आंच वित्तमंत्री चिदंबरम तक पहुंचती दिख रही है। सेन ने सीबीआई को एक खत लिखा है, जिसमें उसने 22 लोगों का नाम लिया है, जिन्होंने उसे पैसा बनाने के लिए इस्तेमाल और ब्लैकमेल किया। इसमें तृणमूल सांसद कुणाल घोष और सृंजय बोस के साथ राष्ट्रीय स्तर के नेता और वित्तमंत्री पी चिदंबरम की पत्नी और वरिष्ठ वकीलनलिनी चिदंबरम का नाम भी शामिल है। सुदीप्त ने 18 पेज की इस चिट्ठी में तृणमूल कांग्रेस के दो सांसदों, वकीलों और पत्रकारों पर ब्लैकमेलिंग व कई अन्य आरोप लगाए हैं। चिट्ठी के मुताबिक, नरसिम्हा राव सरकार में मंत्री रहे मतंग सिंह, उनकी पत्नी मनोरंजना सिंह और सुदीप्तो के बीच डील में नलिनी चिदंबरम वकील के तौर पर जुड़ी थीं। पश्चिम बंगाल में चल रही करीब 73 कंपनियों की कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय को शिकायतें मिली हैं।कॉरपोरेट मंत्रालय भी हरकत में आ गया है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि देश में चल रही सभी चिटफंड कंपनियों की जांच के आदेश दे दिए गए है। हालंकि इसका अभी आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है लेकिन खबर है कि आज सुबह कॉरपोरेट अफेयर मंत्री सचिन पायलट ने कोलकाता में हुए शारदा ग्रुपचिटफंड मामले को लेकर बैठक बुलाई थी जिसमें शारदा समेत देश की सभी चिट फंड कंपनियों की जांच को कहा गया है। जानकारी मिली है कि कोलकाता में हुए शारदा चिटफंड घोटाले को लेकर वित्त मंत्रालय भी सक्रिय हो गया है। और उसने शु्क्रवार को आपात बैठक बुलाई है। इस बैठक में पोंजी स्कीम में हुए घोटालों पर चर्चा होगी। इस बैठक में बैंकिंग सेक्रेटरी, कॉरपोरेट मंत्रालय के सेक्रेटरी समेत वित्तमंत्रालय और दूसरे मंत्रालयों के आला अधिकारी शामिल होंगे।इस बैठक में चिट फंड घोटाले की जांच कर रही अलग-अलग एजेंसियों के काम की समीक्षा की जाएगी। साथ ही जांच एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के लिए उपाय भी इस बैठक में खोजे जाएंगे। सूत्र ये भी बता रहे हैं कि बैंकिंग सचिव ये भी चाहते हैं कि ऐसे घोटालों की जांच में आरबीआई को भी बड़ी जिम्मेदारी मिलनी चाहिए।आपको जानकार आश्चर्य होगा कि देश में कई कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीमें चल रही हैं लेकिन इसमें एक भी सेबी के पास रजिस्टर नहीं है। सेबी ने ऐसी ही फ्रॉड कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीमों के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है। पिछले 2 महीने में सेबी ने ऐसी 5 कंपनियों के खिलाफ ऑर्डर जारी कर निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए कहा है।


 दीदी ने अपनी छवि बचाने के लिए पांच सौ करोड़ के फंड का ऐलान करके राज्य के बदहाल आर्थिक हालात को और पेचीदा बना दिया है। जिस तेजी से एनेक्सी, रोजवैली और दूसरी चटफंड कंपनियों पर बंगालभर में हमले तेज हो गये हैं, उससे सवाल यह उठता है कि बाकी चिटफंड कंपनियों के शिकार  आम लोगों  को  मुआवजा का क्या होगा। दीदी कब तक मुावजा की घोषणाएं करती रहेंगी , व्यवस्था परिवर्तन किये बिना। इसी बीच  चिटफंड सुनामी  ने बंगाल की सीमाएं तोड़कर पूरे बारत को अपनी चपेट में ले लिया है। शारदा समूह के गिरफ्तार मालिक सुदीप्त सेन के पत्रबम का विस्फोट पहले से तमाम घोटालों कटघरे में खड़े राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक पूरे राजनीतिक वर्ग को कटघरे में एक बार फिर खड़ा कर दिया है। इस पत्र में देश के वित्तमंत्री चिदंबरम की पत्नी का नाम भी पबाकी लोगों के साथ हैं। हम पहसले से लिखते रहे हैं कि चिटफंड का मामला देश के वित्तीय प्रबंधन से जुड़ा है। चिदंबरम निवेशकों की ास्था हासिल करने के लिए भारत को बेचने के मकसद से दुनियाबर की सैर कर रहे हैं,तो उनकी पत्नी के शारदा समूह से संबंध उजागर होते हैं। उसीतरह असम के एक मंत्री का नामोल्लेख भी इस पत्र में है। जिसकी प्रतिक्रिया में असम के मुख्यमंत्री तरुण गगोई ने सीधे सीबीआई की मांग कर दी। पर मुआवजे का ऐलान करके जख्मी, लहूलुहान  बंगाल कोमरहम लगाने वाली मां माटी मानुष और चिटफंड की सरकार किसी निष्पक्ष जांच मसलन सीबआाई या केंद्रीय जांच एजंसी द्वारा जांच कराने के लिए फिलहाल तैयार नहीं हैं। हालत किसतरह संगीन है, यह इस तथ्य से साफ है कि राज्य के बहुचर्चित परिवहन मंत्री मदन मित्र को बाकायदा प्रेस में बयान जारी करके सफाई देनी पड़ रही है कि उनका या मुख्यमंत्री का शारदा समूह से कोई संबंध नहीं रहा। इसी बीच परिवहन मंत्री , सांसद कुनाल धोष, सांसद सृंजय बोस के साथ सांसद शताब्दी राय की गिरप्तारी की मांग जोर पकड़ने लगी है। शारदा समूह से सीधे संबंध और मृत तृणमूल नेत्री पियाली से घनिष्ठता के दोहरे आरोप में फंसे मदनबाबू दीदी के बचाव में हैं, इसे आप क्या  कहेंगे!


चिटफंड घोटाले को लेकर गिरफ्तार मुख्य आरोपी सुदीप्त सेन ने सीबीआई को एक चिट्ठी लिखी थी। इसमें जिन 22 लोगों के नाम का उल्लेख किया गया है और इन पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने उससे पैसा कमाने के लिए ब्लैकमेल किया। इन प्रमुख नामों में तृणमूल कांग्रेस के सांसद कुणाल घोष सृंजय बोस के साथ वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की पत्नी का नाम है। चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम एक वरिष्ठ वकील हैं। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कांग्रेस से पूछा है कि क्यों चेन्नई की वरिष्ठ वकील शारदा ग्रुप की डीलें फिक्स कर रहीं थीं। कांग्रेसी नेता को इस पर जवाब देना चाहिए। सेन की इस चिट्ठी में लिखा है कि नरसिम्हाराव सरकार में मंत्री रहे मतंग सिंह, उनकी पत्नी मनोरंजना सिंह और सुदीप्तों के बीच डील में नलिनी चिदंबरम वकील के तौर पर जुड़ी थीं। इस साल मैंने उन्हें एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी। सुदीप्तो ने इस पत्र में लिखा है कि मनोरंजना सिंह ने हमसे संपर्क किया और अपने पॉजिटिव ग्रुप की बिक्री के लिए अपने वकील नलिनी चिदंबरम के पास ले गईं। नलिनी चिदंबरम ने मुझसे कहा था कि मैं उन्हें नार्थ-ईस्ट गुवाहाटी में एक चैनल स्थापित करने में मदद करूं। नलिनी ने मुझे 42 करोड़ रुपये चैनल के लिए देने को कहा।इस बारे में नलिनि चिदंबरम के करीबियों के सूत्रों के मुताबिक नलिनी चिदंबरम ने सफाई दी है। उनका कहना है कि इस मामले से वो एक वरिष्ठ वकील होने के नाते मनोरंजना सिंह की कंपनी की तरफ से जुड़ी थीं। कंपनी की तरफ से उन्होंने कंपनी लॉ बोर्ड में M/4 पॉजिटिव टीवी लिमिटेड और उनके पति मतंग सिंह के खिलाफ याचिका दायर की थी। ये मामला अभी भी CLB के सामने विचाराधीन है। इस मामले को मैंने ही पेश किया और मनोरंजना सिहं को प्रोफेशनल कैपेसिटी में सलाह दी। शारदा ग्रुप ऑफ कंपनीज ने मनोरंजना सिंह की कंपनी में निवेश करने का प्रस्ताव रखा। दोनों पार्टियों की सहमति के बाद ये तय पाया गया कि ये सौदा फायदे का नहीं है। इसलिए इस करार को रद्द कर दिया गया।वहीं चिट फंड घोटाले में वित्तमंत्री पी चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम का नाम आने पर बीजेपी ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। बीजेपी ने कहा है कि इस बात की पूरी छानबीन होनी चाहिए कि नलिनी चिदंबरम की भूमिका सिर्फ व्यवसायिक थी या उनके उनके कुछ और मकसद भी थे। बीजेपी ने इस पूरे मसले पर वित्त मंत्री पी चिदंबरम से भी सफाई देने की मांग की है।भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा कि पश्चिम बंगाल में सामने आये चिटफंड घोटाले की निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिए।


चिट्ठी के मुताबिक दो और लोगों ने मुझे बुरी तरह परेशान किया। पहली हैं मनोरंजना सिंह और दूसरे हैं मतंग सिंह। मनोरंजना सिंह ने अपनी कंपनी पॉजीटिव ग्रुप्स को बेचने के लिए हमें संपर्क किया और अपनी वकील नलिनी चिदंबरम से मिलाने चेन्नई ले गईं। नलिनी चिदंबरम ने हमसे कहा कि हम मनोरंजना सिंह को नॉर्थ ईस्ट में एक चैनल लगाने में मदद करें। नलिनी ने ये भी कहा इसके लिए मनोरंजना की कंपनी को 42 करोड़ दिए जाएं।नलिनी चिदंबरम ने खुद कॉन्ट्रैक्ट तैयार कराया और ये भी कहा कि किसी भी विवाद की हालत में वो एकलौती मध्यस्थ होंगी। साथ ही नलिनी ने करीब डेढ़ साल तक अपनी सेवाएं देने के लिए 1 करोड़ की रकम तय की। ज्यादातर बार जब वो मनोरंजना के साथ कोलकाता आईं तो उनके हवाई जहाज और होटल के बिल मैंने दिए जो काफी बड़ी रकम है। मनोरंजना ने ये भी कहा था कि नलिनी वित्त मंत्री की पत्नी हैं और अगर उन्होंने तुम्हारी मदद की तो शारदा ग्रुप को बहुत फायदा होगा। हालांकि नलिनी चिदंबरम ने मुझे ऐसा भरोसा कभी नहीं दिया। लेकिन उन्होंने मेरी आर्थिक हालत से बढ़कर 42 करोड़ खर्च करने का दबाव बनाया।



जाहिर है कि चिट फंड घोटाले का दायरा बढ़ता जा रहा है। तृणमूल सांसदों के बाद, कांग्रेस के एक केंद्रीय मंत्री पर घोटाले की छाया पड़ती नजर आ रही है। राज्य मंत्री ए एच चौधरी ने पिछले साल शारदा ग्रुप को क्लीनचिट देते हुए प्रधानमंत्री को एक चिट्ठी लिखी थी। आईबीएन7 के पास वो चिट्ठी मौजूद है, लेकिन चौधरी के मुताबिक वो घोटाले के मुख्य आरोपी सुदीप्त सेन को जानते तक नहीं।दरअसल पश्चिम बंगाल के चिट फंड घोटाले में टीएमसी नेताओं के बाद कांग्रेस के नेता भी सवालों के घेरे में हैं। वजह फिर एक चिट्ठी है। लेकिन इस बार चिट्ठी मामले के आरोपी सुदीप्तो सेन की नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल के मालदा से सांसद अबु हसीम खान चौधरी की है। केंद्र में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री, चौधरी ने 15 मार्च, 2012 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिखकर कहा था कि शारदा रियलिटी किसी भी तरह के चिट फंड, माइक्रो फाइनेंस या एनबीएफसी के धंधे में नहीं है। लिहाज़ा उसे रिजर्व बैंक की जांच के दायरे से बाहर कर दिया जाए। शारदा रियलिटी, कंपनी एक्ट के नियमों के तहत कानूनी तौर पर कारोबार कर रही है।चौधरी ने शारदा ग्रुप के खिलाफ सितंबर 2011 को की गई अपनी शिकायतों पर बाकायदा खेद भी जताया। इस चिट्ठी के सामने आने के बाद बैकफुट पर चल रही टीएमसी ने कांग्रेस पर हमला बोल दिया है। लेकिन आईबीएन7 से खास बातचीत में चौधरी ने खुद पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। मंत्री जी जो भी सफाई दें, लेकिन उनकी चिट्ठी ने कांग्रेस के हमलों की धार कमज़ोर कर दी है। साथ ही तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी जैसी पार्टियों को सरकार पर हमले के लिए एक और हथियार भी थमा दिया है। फिलहाल सुदीप्त और उसके सहयोगी पुलिस की हिरासत में है। पुलिस को उम्मीद है कि वो उससे कई राज उगलवा लेगी।


गौरतलब है कि सोनमार्ग के होटल में एक ही कमरे से सुदीप्त और देवयानी की गिरफ्तारी हुई और फरारी के दरम्यान वे लगातार एक ही कमरे में पति पत्नी की तरह रहे हैं। सुदीप्त की दो पत्नियां इस दरम्यान नोएडा में भूमिगत रहीं। कहा जा रहा है कि पियाली और देवयानी ही नहीं, सुदीप्त की महिला ब्रिगेड में दर्जनों सुंदर युवतियां शीर्ष पदों पर रही हैं, मीडिया प्रमुख से लेकर एचआर विभाग तक के जिम्मे में, जिन पर लाखों रुपये हर महीने खर्च होते रहे हैं। सांसद शताब्दी राय शारदा समूह की ब्रांड एंबेसेडर बतायी जा रही हैं।समूह के सोमनाथ दत्त उनके चुनाव अभियान में उनकी ही गाड़ी में उनके साथ वोट मांगते देखे गये। सेक्टर फाइव में शाम ढलने के बाद समूह की युवतियों को इक्ट्ठा करके कामकाज होता रहा है। इसके अलावा शारदा के विभिन्न परिसरों में मधुचक्र का आयोजन होता रहा है, जिसमे ेलिब्रिटी,फिल्मस्टार और राजनेता रातभर पार्टी करते रहे हैं। पूरे पुलिसिया बंदोबस्त के साथ।इसलिए पुलिस सुदीप्त और उसके सहयोगियों से लगातार पूछताछ कर रही है। इन तीनों के मोबाइल और लैपटॉप जब्त कर लिए गए हैं। पुलिस ने सुदीप्तो पर अब तक छह केस दर्ज किए हैं। इसमें से 2 केस चिट फंड फर्जीवाड़े पर है जबकि 4 केस उसकी कंपनी के कर्मचारियों ने तनख्वाह ना मिलने पर दर्ज कराया है। पुलिस का कहना है कि वो जल्द ही कंपनी के बाकी सात डायरेक्टरों से भी पूछताछ करेगी।


सुदीप्त ने छह अप्रैल को सीबीआई को पत्र लिखा। देवयानी और पत्नियों समेत फरार हुए चार दिन बाद, 10 अप्रैल को।उनके फरार होने के ठीक छह दिन बाद 16 अप्रैल को उनके खिलाफ पहली एफआईआर हुा। जाहिर है कि नकदी, जरूरी कागजात गायब करने और सबूत मिटाने के लिए यह वक्त काफी रहा होगा।समूह के सीनियर एजंट वीरभूम के बलराम कांडारी के मुताबिक ब्रांड एंबेसेडर शताब्दी राय ने मार्केटिंग के लिए प्रेरित करने के सकसद से कोलकाता साइंस सिटी में समूह के एक कार्यक्रम का दीप जलाकर उद्घाटन किया, जिसमें हजारों एजंट शामिल थे। उनकी साख की वजह से ही एजंचों ने जी  जान लगाकर समूह के लिए पैसे निकाले।लोकप्रिय फिल्म स्टार शताब्दी राय बीरभूम से सांसद हैं। उनके नायक तापस पाल हैं जो तृणमूल सांसद है उनसे पहले से। दोनों फिल्मों के साथ जात्रा में भी युगलबंदी निभाते हैं। इन्ही तापस पाल ने शारदा समूह के खिलाफ पुलिस अफसर नजरुल इस्लाम की तर्ज पर मुख्यमंत्री को जानकारी दे दी थी। अब उन्ही तापस की नायिका और सांसद शताब्दी राय के खिलाफ वीरभूम में ही शारदा समूहों के एजंटों ने बाकायदा जुलूस निकालकर उन्हें समूह के ब्रांड एंबेसेडर के नाते गिरफ्तार करने की मांग उठाय़ी है।


मालूम हो कि उत्तर प्रदेश में अस्सी के दशक में हुए सनसनीखेज सैय्यद मोदी हत्याकांड को एक भारतविख्यात चिटफंड कंपनी के उत्थान के साथ जुड़ा हुआ माना जाता है। उत्तर प्रदेश में ही नब्वे के दशक में अपेस इंडिया नामक कंपनी ने लाखों लोगों को चूना लगाया और इस कंपनी से भी राजनेता, खिलाढ़ी और तमाम तरह के स्टार जुड़े थे। दोनों मामलों में कुछ साबित नहीं हुआ। सुदीप्त और शारदा समूह के राज खुले तो भारतीय राजनीति, केल जगत और फिल्म उद्योग के अनेक भेद खुल जाएंगे। इसलिए बहुत संभव है कि सारी नकदी छुपा लेने के बाद सुदीप्त का यह पत्र उनके लिए रक्षा कवच साबित हो।गौरतलब है कि शारदा चिटफंड प्रकरण को लेक पहले से ही कोलकाता हाईकोर्ट में मामला चल रही है। दो दो जनहित याचिकाएं लंबित हैं।ताजा घटनाक्रम के मद्देनजर हाईकोर्ट ने इस घोटाले पर चिंता जताते हुए दो मई तक राज्य करकार को हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है।हाईकोर्ट में अगली सुनवाई तीन मई को है। हाईकोर्ट ने शारदा समूह की किसी संपत्ति के हस्तांतरण पर रोक भी लगा दी है।


पश्चिम बंगाल में 20 हजार करोड़ रुपये के शारदा चिटफंड घोटाले की तपिश केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम तक पहुंचती दिख रही है। कंपनी के चेयरमैन सुदीप्त सेन की सीबीआई को लिखी चिट्ठी में उनकी पत्नी नलिनी चिदंबरम की तरफ भी उंगली उठाई गई है।चिट्ठी में एक केंद्रीय मंत्री की वकील पत्नी का जिक्र है, जो नॉर्थ ईस्ट में एक चैनल की डील में सुदीप्तो और नरसिम्हा राव सरकार में मंत्री मतंग सिंह और उसकी पत्नी मनोरंजना सिंह के बीच डील में वकील के तौर पर जुड़ी थीं। ये केंद्रीय मंत्री वित्त मंत्री पी. चिदंबरम हैं और नलिनी उनकी वकील पत्नी हैं। इस खुलासे ने इस मामले में बुरी तरह घिरी तृणमूल कांग्रेस को कांग्रेस पर हमला करने का मौका दे दिया है। तृणमूल अब इस मुद्दे को संसद में उठाने की रणनीति बना रही है।उधर, सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय ने इस मामले पर शुक्रवार को बैठक बुलाई है। इसमें कई आला अधिकारी शामिल होंगे और देश में चल रहे चिटफंड कारोबार पर चर्चा होगी। दूसरी तरफ कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय भी शारदा समूह की कंपनियों के मामले में जांच के आदेश दे सकता है। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री सचिन पायलट मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक कर सकते हैं, जिसमें शारदा समूह की कंपनियों समेत विभिन्न चिटफंडों की कार्यप्रणाली पर चर्चा होगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चिटफंड घोटाले का खुलासा होने के कारण मंत्रालय शारदा समूह की कंपनियों की जांच करवा सकता है।


खबरों के मुताबिक अस्सी के दशक में बद हुई चिटफंड कंपनी संचयनी के भूदेव सेन के बेटे हैं सुदीप्त।हालांकि सुदीप्त ने संचयनी आ भूदेव सेन से कोई रिश्ता होने से इंकार किया है।यह भी आरोप है कि सुदीप्त ने नब्वे के दशक में प्लास्टिक सर्जरी से अपना चेहरा बदल लिया था।किसी को मालूम नहीं है कि वह कहां रहता था। कोलकाता में ही उसके कम से कम पांच मकान हैं। इसीतरह उनकी खासमखास देवयानी के चार पांच फ्लैट हैं।ममता दीदी ने कहा बताते हैं कि सुदीप्त की तीन तीन पत्नियां हैं।


सुदीप्त ने छह अप्रैल को सीबीआइ को लिखे गए अट्ठारह पन्ने के पत्र  में तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं पर पैसे मांगने, ब्लैकमेलिंग व कई अन्य आरोप लगाए हैं।सुदीप्त ने कहा है कि तृणमूल के दो सांसद और असम के एक मंत्री समेत 22 नेताओं को पैसे दिए हैं। तृणमूल कांग्रेस के नेता उसे ब्लैकमेल भी करते थे।लेकिन तृणमूल प्रमुख व बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले में पार्टी के किसी नेता के जुड़े होने से इन्कार किया है।सेन ने लिखा है कि एक बांग्ला न्यूज चैनल खरीदने के लिए उन्हें बाध्य किया गया। अखबारों से जुड़े दोनों सांसदों ने दवाब बनाकर 60 लाख रुपये प्रतिमाह एक बांग्ला दैनिक को देने के लिए कहा। तृणमूल के दोनों सांसदों में से एक को उक्त चैनल का सीईओ बनाया गया और मासिक वेतन 15 लाख रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया गया। इसके अलावा एक गाड़ी व तेल आदि के खर्च की बाबत 1.50 लाख रुपये प्रतिमाह देना पड़ रहा था। सुदीप्त ने आगे लिखा है कि इन रुपये के बदले दोनों सांसदों ने उसे आश्वस्त किया था कि चिट फंड कंपनी चलाने में उसे केंद्र व राज्य सरकार की ओर से किसी प्रकार की अड़चन का सामना नहीं करना पड़ेगा। यानी सरकारी व प्रशासनिक सुरक्षा। आगे लिखा है कि उन दोनों सांसदों में से एक सॉल्ट लेक स्थित आवास पर आकर उससे जबरदस्ती कुछ कागजों पर हस्ताक्षर कराया। उक्त सांसद के चले जाने पर कागज को देखा तो पता चला कि उक्त बांग्ला चैनल को मात्र 55 लाख रुपये में बेचा गया है।



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