Friday, December 20, 2013

हिंदी स‌माज की दिशाहीनता ही आज इस अनंत वधस्थल की असली नींव,कारपोरेट कायाकल्प का यह वृहत मीडिया खेल समझो भइये!

हिंदी स‌माज की दिशाहीनता ही आज इस अनंत वधस्थल की असली नींव,कारपोरेट कायाकल्प का यह वृहत मीडिया खेल समझो भइये!


पलाश विश्वास

आज का संवाद

हिंदी स‌माज में गृहयुद्ध का राजनीतिक मतलब बेहद स‌ंगीन है और हिंदी स‌माज की दिशाहीनता ही आज इस अनंत वधस्थल की असली नींव है।धर्मनिरपेक्षता बनाम स्त्री अस्मिता का यह गृहयुद्ध हमारे स‌भी जरुरी मुद्दों को हाशिये पर धकेल रहा है और आपसी कटुता इस स्तर तक पहुंच रहा है कि विमर्श का माहौल ही खत्म हो रहा है।


कृपया इस तिलिस्म का दरवाजा खोलने के लिए खुलकर लिखें फेस बुक पर।

गुगल प्लस पर भी लिख स‌कते हैं।



Economic and Political Weekly

AAP's amazing run in the Delhi polls have thrown up interesting voting patterns across demographics and geographies. Here's EPW's analysis of AAP's voteshare through interactive maps:

http://www.epw.in/web-exclusives/aam-aadmi-partys-win-delhi-dissecting-it-through-geographical-information-systems.htm

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हमारे प्राचीन साथी उर्मिलेश और प्राचीन परिचित उदय प्रकाश के बयानों का स्वागत है लेकिन इनके अलावा फेसबुक पर रचनाकारों,पत्रकारों,संस्कृतिकर्मियों,सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाजनों,छात्रों,महिलाओं, बुद्धिजीवियों और कर्मचारियों की फौजें लामबंद हैं।बुनियादी मुद्दों पर बाकी लोगों की प्रतिक्रिया का बेसब्री से इंतजार है ताकि एक राष्ट्रव्यापी संवाद बदलाव के लिए शुरु किया जा सकें।तमाशा देखने का मनोरंजक समय यह है नहीं, संसद और संसद के बाहर जो हो रहा है,उसके खतरनाक संकेत हैं। कारपोरेट राज का कायाकल्प हो रहा है। मामला अब नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी का कतई नहीं है। मामला सीधे तौर पर नंदन निलेकणि और अरविंद केजरीवाल का है,जो मनमोहन ईश्वर के अवसान के बाद कारपोरेच राज के नये ईश्वर बतौर सुनियोजित तरीके से स्थापित किये जा रहे हैं।बायोमेट्रिक डिजिटल रोबोटिक समय में भारत अमेरिकी राजनय युद्ध की आड़ में तमाम समीकरण साधे जा रहे हैं।फर्जी प्रोफाइल की तरह फर्जी मुद्दों का बवंडर खड़ा किया जा रहा है और असली मुद्दे सिरे से गायब है। वंचित तबकों की राजनीति का कारपोरेटीकरण हो रहा है। जनांदोलनों का भी कारपोरेटीकरण अंतिम चरण है।सारे विमर्श कारपोरेट एजंडा के मुताबिक हैं। जागो भइया,जागो ,सिंहद्वार पर दस्तक है भारी।जाग सको तो जाग जाओ भइया।


इसी बीच उत्तराखंड से अच्छी खबर है कि उत्तराखंड महिला मंच का सम्मेलन हो रहा है। उत्तराखंडी स्त्री विमर्श राजधानियों के विमर्श से उसीतरह भिन्न है जैसे अरुंधति राय,इरोम शर्मिला,सोनी सोरी,तमाम आदिवासी श्रमजीवी और पूर्वोत्तर की महिलाओं का विमर्श।हमें राष्ट्रीयस्तर पर प्रतिरोधी सामाजिक शक्तियों के समन्वय का हरसंभव प्रयास करना होगा अगर हम भारतीयजन गण और लोक गणराज्य भारत के प्रति किसी भी स्तर पर प्रतिबद्ध है।ऐसा करने के लिए सबसे पहले संवाद और विमर्श का उनमुक्त स्वतंत्र वातावरण बनना जरुरी है।फर्जी बवंडरों के तिलिस्म तोड़कर बाहर आना है।मौकापरस्त मेधा को जनसरोकार से जोड़कर सन्नाटा तोड़ना है। सड़क पर उतरना अब लगभग असंभव है।लेकिन संवाद और विमर्श की गुंजाइश अभी है।अभिव्यक्ति के सारे दरवाजे बंद भी नहीं हुए हैं।माध्यमों को जनपक्षधरता के मकसद से इस्तेमाल करें तमाम समर्थ लोग तो यकीनन हम इस दुस्समय के मुकाबले खड़े हो सकते हैं।


Urmilesh Urmil असल में हमारे हिन्दी समाज के बौद्धिक तमाम तरह के आग्रहों-पूर्वाग्रहों में जीते हैं। बडे सामाजिक बदलाव के साथ ही उन्हें भी मुक्ति मिलेगी।


पहली प्रतिक्रिया के लिए पुरातन मित्र राज्यसभा टीवी के स‌ंचालक उर्मिलेश जी का धन्यवाद।वे कहीं बेहत लिख स‌कते हैं ।विस्तार स‌े भी। चाहे तो राज्यसभा टीवी पर बहस भी शुरु कर स‌कते हैं।

  • Dheeresh Saini दुर्भाग्यपूर्ण स्थितियां हैं। कई बार लोगों के अपने संस्कार, अपने हित ऐसा कराते हैं, कई बार अस्मिताओं की राजनीति। पता नहीं मैं अपनी बात ठीक से कह पा रहा हूं या नहीं।

  • 3 hours ago · Like

  • Palash Biswas आप लोग खुलकर आवाज तो एकबार बुलंद कीजिये।

  • a few seconds ago · Like

Rajiv Nayan Bahuguna

मीडिया ( माध्यमों ) को वाच डॉग अर्थात रखवाली करने वाले श्वान की संज्ञा प्राप्त है , लेकिन कुछ समय से मीडिया खौकडया कुकूर की तरह जिस तिस को काट खा रहा है . देहरादून के तीन पत्रकार सेक्स रेकेट में दलाली में लिप्त पाए गए हैं . नेताओं , रंडियों और माफियाओं की दलाली - रखवाली करने वाले पत्रकार के वेश में छुपे भेड़ियों को बे नकाब करो , वरना सब मारे जाओगे

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बेहद  जरुरी है।


मुसलमानों के खिलाफ घृणा अभियान का नायाब तरीका यह भी।ऎसे फर्जी प्रोफाइल ने माहौल स‌बसे ज्यादा बिगाड़ा डुआ है।

Sayra Khan Abae madarchod hizde ki aulad, jara jake teri maa aur bahen ko to bacha, teri maa ko bahen ko aake hum muslim tumhare ghar main aake chod gaye. tuz main himmat hai to hizde ki aulad zara kuchh kisi muslim ka bigadke dikha. jab teri maa bahen koo muslimone choda tha tab to tera hizda baap ro raha hoga. tabhi to madarchod aaj bhi hum india main hai. tu to kya tera baap bhi hamare gulam hi ho. hahhahahaha............. sirf bolne se kuchh nahi hota. pahele tere hi chhati par kitne muslim aaj bhi chhatinikalke ghum rahe hai. kisiko mar saka aaj tak tera baap bhi ? salle hizde ki aulad zuban sirf tu chala sakta hai ? yehi mardangi dikha sakta hai hindu bhadwe ? chal main bhi dikhati hun teri maa ka bhosda chir ke.

6 hours ago · Like


Umesh Tiwari वाह पलाश इतनी बढ़िया हिन्दी में ' जनपक्ष बनाम कारपोरेट विमर्श' !... उत्तराखंडी बहिने यदा-कदा सड़कों पर भी होती हैं पर दुस्समय तो है ही।

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Sudha Raje

पूनम पांडे ।

शर्लिन

देवयानी

कैटरीना

सनी लियोन


मीडिया


बिग बॉस


सेक्स सर्वे


औरतों को किस रूप में पसंद करते है पुरुष


सुजैन


और???????


मीडिया


ग्रेस होम जयपुर पादरी जैकब जॉन 29आदिवासी नाबालिग लङकियाँ


आशाराम


नारायण साई


कश्मीर मौलाना

200लङकियाँ


मीडिया


??????????????


चाहे आप आज तक देख रहे हो चाहे

कोई और बेब न्यूज पोर्टल


एक बीबी पर चुटकुला


एक लङकी पर चुटकुला


एक चुटकुला कॉलेज स्कूल की लङकियों पर


और????


नहाती हुयी औरत


बाल सुखाती औरत

बच्चे को दूध पिलाती औरत


पति से कान में बतियाती औरत


छाता लेकर निकलतीं लङकियाँ


हर तरफ


मीडिया

एक ही सुर से आधी से ज्यादा खबरों में


सिर्फ और सिर्फ औरत की देह परोस रहा है ।


कभी एक पत्रिका राजनीति शास्त्र की पी एच डी के नोट्स बनाने को पढ़ने डाक से मँगाते थे


आज घर की टेबल पर से अधिकांश पत्रिकायें नदारद है


आप कहीं इंडिया टुडे पढ़ रहे है या महिला प्रधान कोई बंबईय़ा मैगजीन


परिवार की टेबल पर रखना लज्जित करेगा


ये है आधा स्याह चेहरा


क्या कहना है आपका?

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  • Sudha Raje, Nityanand Gayen, Malik Rajkumar and 42 others like this.

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  • Sudha Raje औरते जो अपनी शालीनता से समाज की मुख्यधारा पर टिकना चाहती है बिना मजहब राजनीतिक दल और मठवाद के हाशिये पर क्यों है?

  • 35 minutes ago via mobile · Like · 1

  • Sudha Raje औरतें जो औरत पुरुष मर्द इन बातो से अलग अन्य मुद्दो पर लिख रही है वह इतना सुना कब जाता है? स्त्री लेखन से केवल स्त्री की ही बात क्यों?? लेडी डॉक्टर केवल गायनोकोलोजिस्ट या पीडियाट्रीशियन ही हो ये ही क्यों एक अघोषित प्रचलन है बङा मायाजाल है ।।।अभी आधी मीडिया भी नहीं स्त्री के पास

  • 32 minutes ago via mobile · Like · 1

  • Raja Kumarendra Singh Sengar क्या कह सकते हैं

  • 16 minutes ago via mobile · Like · 1

  • Sudha Raje संतुलन बनाना होगा ये गृहयुद्ध जैसे आसार है या तो अश्लीलता खत्म हो ।।।या तो पत्रकार साहित्कार कहलाने की बजाय औरत के बदन का भङवा दल्ला कहलाना स्वीकार करे जो समाज की औरतो के जिस्म परोसता है अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर ।।।सुधारने कोई जूपिटर से साबू नहीं आयेगा ।।।राजाराममोहन चाहिये ईश्वरचंद्र चाहिये रमाबाई पंडिता और रानाडे चाहिये

  • 4 minutes ago via mobile · Like

Sudha Raje

सुधा टोटके चंद है नोट करें श्रीमान ।

एक्ट निर्भया से बचे बंधु आपकी जान ।

बंधु आपकी जान कंजके नित्य जिमाना ।

रोज जहाँ भी मिलें कुमारी शीश झुकाना ।

कहें सुधा कविराय अगर हो नार परायी

मिलते ही जिज्जी कह देना काकी ताई ।

©®सुधा राजे

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Reuters India

Khobragade stands accused in New York of fraudulently obtaining a work visa for her housekeeper and paying a fraction of the minimum wage.

Devyani Khobragade urged to stand for parliament

in.reuters.com

The Samajwadi Party has urged Devyani Khobragade, the woman at the centre of a diplomatic storm in the United States, to stand for parliament, highlighting how public outrage has turned the case into a battleground for votes ahead of next year's election.

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Abhishek Srivastava via Junputh

लोकप्रियता के साथ संदेह अनिवार्यत: जुड़ा है। राजनीति का इतिहास बताता है कि लोकप्रियता का मोह आपको इतना संदिग्‍ध बना देता है कि आप किसी संदेह के निर्णायक क्षण में लोकप्रियता चले जाने के डर से आत्‍मघाती कदम भी उठा सकते हैं। आखिर, संदेह के इस विराट क्षण में 'लोकप्रिय' के होने और न होने के बीच की स्थिति को कैसे समझा जाए? क्‍या मार्क्‍सवाद इसमें हमारी कुछ मदद कर सकता है?

जनपथ : संदेह के महान क्षण में

junputh.com

लोकप्रियता के साथ संदेह अनिवार्यत: जुड़ा है। राजनीति का इतिहास बताता है कि लोकप्रियता का मोह आपको इतना संदिग्‍ध बना देता है कि आप किसी संदेह के निर्णायक क्षण में लोकप्रियता चले जाने के डर से आत्‍मघाती कदम भी उठा सकते हैं। आखिर, संदेह के इस विराट क्षण में 'लोकप्रिय' के होने और न होने के बीच की स्थिति को कैसे समझा जाए? क्‍या मार्क्‍सवाद इसमें हमारी कुछ मदद कर सकता है?

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Economic and Political Weekly

"Kejriwal's idea of politics shows strains of similarity with Rousseau's social contract theory, where the idea of popular sovereignty, or the sovereignty of the people, gains authority over parliament. It is an idea of a free government, where people decide on governmental decisions."

Read AAP: Government of the Governed? in EPW Web Exclusives:

http://www.epw.in/web-exclusives/aam-aadmi-party-government-governed.html

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Lalajee Nirmal

मुझे गर्व है कि मैं बहुजन समाज से हूं : उर्मिलेश

Unlike ·  · Share · 4 seconds ago ·



उदय जी और दूसरे स‌ाथियों स‌े निवेदन,धर्मनिरपेक्षता बनाम स्त्री अस्मिता का यह गृहयुद्ध हमारे स‌भी जरुरी मुद्दों को हाशिये पर धकेल रहा है और आपसी कटुता इस स्तर तक पहुंच रहा है कि विमर्श का माहौल ही खत्म हो रहा है।किनारे बैठकर तमाशा देखने के बजाये ,हमारे यहां हिंदी स‌माज के जो नायक महानायक,नायिकाएं महानायिकाएं हैं,उन्हें हिंदी मानस को स‌ही दिशा देने में पहल करने में देरी नहीं करनी चाहिए वरना आपसी मारकाट में बहुत जल्द तबाह होंगे लोग।इतनी अनास्था और प्रतिशोद के परिवेश में किसी का दामन बेदाग बचेगा नहीं।कोई भी किसी को कटघरे में खड़ा कर देगा और आरोप स‌ाबित होने स‌े पहले फांसी पर लटका दिये जायेंगे वे तमाम लोग स‌ामाजिक स‌रकार की लड़ाई जो लड़ रहे हैं। कारपोरेट कायाकल्प का यह वृहत मीडिया खेल है।जिसे स‌मझने में हमारे स‌ाथी गलती कर रहे हैं।नयेईश्वरों का जन्म हो चुका है और वे हमारी दुनिया तबाह कर देंगे।आप लोग कविता कहानी लिखकर कालजयी होते रहिये।चितकोबरा के लिए स‌ाहित्यअकादमी हासिल करते रहिये।


मित्रों,हस्तक्षेप पर खुरशीद के बहाने  जो मेरी प्रतिक्रिया दर्ज हुई उस पर तनिक गौर कीजियेगा।लड़ाई धर्मनिरपेक्षता बनाम स्त्री अस्मिता कतई नहीं है।स्त्री अस्मिता के जागरण के बिना हम कहीं नहीं होते और धर्म निरपेक्षता स्त्री अस्मिता के बिना असंभव है।


  • Uday Prakash likes this.

  • Uday Prakash हम लोग तो धूल और गर्द हैं, ठीक-ठीक नागरिक भी नहीं पलाश जी । साहित्यकार वग़ैरह दूसरे लोग हैं । हमें तो अपना जीवन बचाना है ।

  • 2 minutes ago via mobile · Like

  • Palash Biswas उदय जी,आप बिल्कुल स‌ही बता रहे हैं।असली मुद्दा यही है।वजूद का स‌ंकटहै यह।हम लोग बाकायदा एक जादुई तिलिस्म में कैद हैं और हमें अहसास तक नहीं हैं।खुद स‌े टकराकर लहूलुहान हो रहे हैं हम स‌ारे लोग।

  • a few seconds ago · Like

Rajiv Lochan Sah

उत्तराखंड राज्य निर्माण में जिन ताकतों का सबसे ज्यादा योगदान रहा, उनमें उत्तराखंड महिला मंच भी एक है। राज्य बनने के बाद सारी ताकतें थक कर चुप हो गयी हैं। इस वक़्त उत्तराखंड महिला मंच का द्वि दिवसीय 20वां स्थापना सम्मलेन सुचेतना, निर्मला कॉन्वेंट, काठगोदाम में चल रहा है। मुझे आशंका थी कि महिला मंच भी कहीं थक न गया हो। लेकिन बहुत अच्छा लगा, जब प्रदेश के कोने-कोने से आयी 50 से अधिक बहनों को बड़ी ईमानदारी और निर्ममता से अपना विश्लेषण करते देखा। आखिर राज्य आन्दोलन के दौर में यही तो वह संगठन था, जिसने नारा दिया था ' एक रहेंगे जुटे रहेंगे मिल जुल कर संघर्ष करेंगे, राज्य हमारा कैसा होगा सदा इसी पर बहस करेंगे'। बाकी लोग तो कहते रह गये कि 'आज तो अभी दो उत्तराखंड राज्य दो' और जब राज्य बन ही गया तो इसे लुटेरों के खाने-कमाने के लिये छोड़ कर किनारे हो गये...

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  • Bachiram Pant, Dataram Chamoli and 6 others like this.

  • Saroj Anand Joshi ab nari shakti ko bhi age ane ki zarurat hai

  • 12 minutes ago · Like

  • Palash Biswas मुझे भी उत्तराखंडी महिलाओं स‌े ही न स‌िर्फ उत्तराखंड बल्कि देश बदलने की उम्मीद है और वे हमेशा की तरह निराश नहीं करेंगी।अपनी इजाओं,बैणियों और भूलियों की क्षमता,चिपको माता गौरादेवी की स‌ंतानों के स‌ामर्थ्य में उत्तराखंड स‌े हजार मील दूर बैठे हुए भी मुझे पक्का यकीन है। हमें,बदलाव की स‌ारी ताकतों को उनकी अगुवाई में गोलबंद होना चाहिए।देशभर में जिस देहमुक्ति के स्त्री विमर्श का हंगामा बरपा है,उससे अलग उत्तराखंडी महिलाओं का विमर्श स‌ीधे स‌ीधे भूमि स‌ुधार ,पर्यावरण चेतना और जल जंगल जमीन नागरिकता आजीविका मानवाधिकार नागरिक अधिकार जैसे बुनियादी हक हकूक के स‌ाथ जुड़ता है।वे हमारे असली आत्मीय हैं और हम हमेशा उनके स‌ाथ ही खड़े हैं।जैसे हम इरोम शर्मिला और सोनी सोरी के साथ खड़े हैं।

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Himanshu Kumar

December 15 near Delhi

क्या मजदूरों का ठेका प्रथा की गुलामी से मुक्ति हो चुकी ? क्या किसानों की आत्महत्या रुक चुकीं , क्या आदिवासी इलाकों के लोगों की ज़मीनों पर कब्ज़े रुक गए ? क्या औरतों को बराबर मान लिया गया है ? क्या दलितों की बस्तियां जलनी बंद हो चुकीं ?


नहीं इनमे से कुछ भी नहीं रुका है . लेकिन ये सब हमारे विमर्श से क्यों गायब हो गये है .


ये मुद्दे पहले टीवी और अखबारों से गायब हुए . लेकिन फेसबुक जैसे वैकल्पिक मीडिया के कारण सरकारें मजबूर होकर इन पर कार्यवाही करने के लिए मजबूर होती रहीं .


पिछले कुछ समय से देख रहा हूँ कि हाशिए पर पड़े करोड़ों लोग फेसबुक की चर्चा से गायब हैं .


ऐसा क्यों हुआ ?

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हमें स‌मझना चाहिए कि कारपोरेट राज के कायाकल्प और आर्थिक स‌ुधारों के दूसरे चरण के लिए फर्जी मुद्दे कारपोरेट एजंटों और कारपोरेट मीडिया की ओर स‌े उछाले जा रहे हैं और इस स‌ुनामी में हमारे मुद्दे स‌िरे स‌े गायब हो रहे हैं। हिंदी स‌माज में गृहयुद्ध का राजनीतिक मतलब बेहद स‌ंगीन है और हिंदी स‌माज की दिशाहीनता ही आज इस अनंत वधस्थल की असली नींव है।

Himanshu Kumar shared a link.

December 18 near Delhi

दो ख़बरें इधर आयी पहला - मजदूर ठेकेदार ने मजदूर का हाथ इसलिए काट दिया कि वह मजदूरी उसकी शर्तों पर नहीं करना चाहता था .दूसरा -अमेरिका में भारतीय राजनयिक देवयानी ने नौकर को वाजिब मजदूरी नहीं दिया तो अमेरिकी कानून के तहत उसे गिरफ्तार कर लिया गया और वह जुर्माना भरकर ही छूट पायी .सामान्यतः दोनों मामले मजदूरी से जुड़े है मगर दूसरी घटना से हमारा देश उबल पड़ा उसकी देशभक्ति देखने लायक है !! मगर पहली घटना को कोई संज्ञान नहीं लिया न मोदी ,न राहुल ,न गृहमंत्री ....गोया यह छोटी -मोटी घटनाओं पर ध्यान किसलिए दिया जाय !! यह देशभक्त होने कि गारंटी भी नहीं देता? -Divya Gupta Jain

http://cgnetswara.org/index.php?id=27592


Rajiv Nayan Bahuguna

ओनली फॉर यु

Unlike ·  · Share · August 22 at 2:00pm ·

  • You, Rajiv Nayan Bahuguna, Himanshu Bisht, त्रिभुवन चन्द्र मठपाल and 83 others like this.

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  • Ved Uniyal केवल बांसुरी से भावुकता नहीं उपजती भैजी। बहुत छोटी सी एक बात कही थी आपसे। मंत्री और नौकरशाहों की तरह आपने भी चाहा कि मैं आपके चक्कर काटता रहूं। कुछ अजीब लगा।

  • August 22 at 11:46pm · Like · 1

  • Manish Oli वाह.........., पर बहुत जल्द समाप्त हो गया।

  • August 23 at 9:10am · Like · 2

  • Sanjay Kaushik Kaushik वाह.........., पर बहुत जल्द समाप्त हो गया।

  • 9 minutes ago · Like

  • Rajiv Nayan Bahuguna बिजिली की कौंध है जी

  • 7 minutes ago · Like

  • Palash Biswas नयन दाज्यू।मेरे पीसी पर फ्लैश डीएक्टिव है।नया लोड नहीं करा स‌कता।इसलिए यूट्यूब में आवाज नहीं आती।आप ऎसा वीडियो जारी करके हमारे धीरज की अग्निपरीक्ष ले रहे हैं।

  • 4 minutes ago · Like · 1

  • Rajiv Nayan Bahuguna हा हा हा

  • 3 minutes ago · Like

  • Palash Biswas मेरा हाल तो यह है कि मांधाता जमाने का मोबाइल है जिसपर बैटरी लगातार चार्ज पर रखना होता है।ऎसे ऎप्स स‌े काम चला रहा हूं।

  • 3 minutes ago · Like · 1

  • Palash Biswas नयन दाज्वू स‌विता इधर बेहद आक्रामक हो गयी है।कहती है कि अपनी बिरादरी को देखो,कैसे घर बना रहे हैं और घर भर रहे हैं लोग।एक तुम हो रात दिन देश बदलने चले हो जो पहले ही इतना बदल गया है कि किसी चीज का कोई मायने है नहीं।जो लिखते हो वह भी कोई नहीं पढता। बहुत स‌ंकट में हूं।अच्छा होता कि बांसुरी की धुन में कुछ तो तबीयत हरी हो जाती।

  • a few seconds ago · Like

अमर्त्य स‌ेन नोबेल बाबू हैं।अमूमन अर्थशास्त्र के स‌ारे विशेषज्ञ अमेरिकी हैं।दो छींके भारतीय उपमहाद्वीप में भी टूटे।एक भारत में तो दूसरा बांग्ला देश में।उसके नतीजे कारपोरेट राज के हक में वैचारिक क्रांति के स‌ाथ उदबिलाव प्रजाति के कुछ जंतुओं के अवतार स‌े हुआ जो अब भारतीय जन गण के भाग्य विधाता हैं।गुजरात नरसंहार में मोदी अपराधी और सिख स‌ंहार में कांग्रेस बरी।यह भी उदबिलाव युक्ति है।मित्रों इस पर भी बहस होनी चाहिए।

1984 के दंगों की तुलना गुजरात दंगों से नहीं की जा सकती: अमर्त्य सेन


Wednesday, 18 December 2013 13:02

*नई दिल्ली। नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन सेन ने कहा है कि 2002 में गुजरात में हुए दंगों की तुलना 1984 में दिल्ली में हुए सिख विरोधी दंगों से नहीं की जा सकती है।

दरअसल इंफोसिस प्रमुख एन आर नारायणमूर्ति ने कहा था कि गुजरात में हुए दंगे नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के मार्ग के बीच नहीं आने चाहिए। सेन ने नारायणमूर्ति के इस विचार को खारिज करते हुए यह बयान दिया।

सेन ने हालांकि इस तथ्य को ''अत्यंत शर्मनाक'' बताया कि 1984 के दंगों के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में नहीं लाया गया लेकिन उन्होंने सिख विरोधी दंगों और गुजरात में हुए दंगों में अंतर बताया।

सेन ने तर्क दिया कि चुनावों में लड़ रहे मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कांग्रेस नेता सिख विरोधी दंगों के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। किसी ने उन पर इसका आरोप नहीं लगाया जबकि गुजरात में जब दंगे हुए तो उस समय नरेंद्र मोदी राज्य के मुख्यमंत्री थे।

उन्होंने एक निजी समाचार चैनल को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि सिख विरोधी दंगे कांग्रेस के सिद्धांत के अनुरूप नहीं हैं। सेन ने कहा कि गुजरात में मुसलमानों के साथ किए जाने वाले व्यवहार ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या उनके साथ दूसरे दर्जे के नागरिकों जैसा बर्ताव किया जाता है।

उन्होंने कहा, '' यह समस्या लगातार बनी हुई है।''

उन्होंने साथ ही कहा कि नारायणमूर्ति उनके बहुत अच्छे दोस्त हैं लेकिन वह इस मामले में उनसे सहमत नहीं हैं।

यह पूछे जाने पर कि हाल में हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम मोदी की लहर दिखाते हैं या ये परिणाम कांग्रेस के खिलाफ लहर का नतीजा हैं, सेन ने कहा, '' मुझे लगता है कि शायद देश में कांग्रेस विरोधी लहर है और ऐसा इसलिए है क्योंकि शायद पार्टी थकी हुई है।''

उन्होंने कहा, '' ऐसा शायद इसलिए हैं क्योंकि मोदी के बारे में एक बड़ी बात यह है कि कांग्रेस में जब नेतृत्व की समस्या का समाधान नहीं होता है तो किसी मजबूत नेता को इसका लाभ होता है।''

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें लगता है कि कांग्रेस को राहुल गांधी को औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर देना चाहिए, सेन ने कहा,

'' उनकी अपनी कोई रणनीति होगी। चुनाव जीतने का वादा करके चुनाव नहीं जीता जाता। मुझे नहीं पता कि चुनाव जीतने के लिए इस समय कांग्रेस की रणनीति क्या है।''

सेन ने आम आदमी पार्टी के उदय के बारे में कहा कि वह इसका स्वागत करते हैं लेकिन उन्हें उसके प्रदर्शन को लेकर संशय है।

उन्होंने कहा, '' इस मामले में खुश होने के दो कारण हैं- एक कारण यह है कि ऐसा हुआ और दूसरा यह है- हम भारतीय बहुत निराशावादी हैं और यदि कोई चीज जो यह दिखाती है कि उन्होंने आशावादी सोच दिखाई है तो वह अच्छी ही होगी। इसलिए दोनों ही कारणों से मैं खुश हूं। ''

सेन ने कहा कि उन्हें लगता है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी के लिए चुनौती बहुत आसान है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई पार्टी भारतीय राजनीति की एक बड़ी ताकत बनेगी।

यह पूछे जाने पर कि उच्चतम न्यायालय के समलैंगिकता को फिर से अपराध की श्रेणी में लाने के फैसले ने उन्हें निराश किया है, उन्होंने कहा, '' बेहद निराशाजनक कहना भी कम होगा..... मैं यह नहीं दिखाऊंगा कि मैं उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों से ज्यादा जानता हूं लेकिन आप अब भी यह प्रश्न पूछ सकते हैं कि क्या तर्क सही था।''

उन्होंने कहा कि यह अल्पसंख्यकों के अधिकारों और मानवाधिकारों की रक्षा का एक मसला है।

सेन ने कहा ,'' मुझे लगता है कि मानवाधिकार और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए आपको संसद में बहुमत के आशीर्वाद का इंतजार करना होगा और उच्चतम न्यायालय इसके बारे में कुछ नहीं करेगी, यह कहना उच्चतम न्यायालय की भूमिका समझने में असफलता प्रतीत होती है।


Bonded laborers refused to go to work so were punished by cutting hands...

cgnetswara.org

CGnet Swara is a platform to discuss issues related to Central Gondwana region in India. To record a message please call on +91 80 500 68000.

Himanshu Kumar

December 17 near Delhi

जातिगत आरक्षण का विरोध करने वाले कह रहे हैं कि आरक्षण के कारण अयोग्य लोग सरकारी अधिकारी ,डाक्टर और वैज्ञानिक बन गये हैं .


तो जातिगत आरक्षण के कारण अधिकारी डाक्टर या वैज्ञानिक बने किसी अयोग्य का उदाहरण देने का कष्ट करेगा कोई ?


लेकिन याद रखना फिर मैं अयोग्य ब्राह्मणों , अयोग्य ठाकुरों और अयोग्य बनियों की सूची भी जारी करूँगा जो पारिवारिक जान पहचान या पैसे के दम पर बड़ी बड़ी नौकरियों पर काबिज हैं और भयंकर भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं तथा देश और समाज के द्रोही हैं .


इसलिये जाति समाप्त करने की मुहीम में जुडिये . जाति के रहते आरक्षण समाप्त करने की मांग असामाजिक और क्रूर मांग है .


आरक्षण तो आबादी में विभिन्न जातियों के अपने हिस्से के बराबर ही नौकरी में उनका हिस्सा देने में मदद करने के लिये है . ये अलग बात है कि ज्यादातर आरक्षित पदों पर भी बड़ी जातियों का कब्ज़ा है .


क्योंकि आरक्षित जातियों में शिक्षा का विकास नहीं हुआ इसलिये वो तो अभी तक अपने हिस्से की नौकरियाँ भी नहीं पा सके .

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Himanshu Kumar

December 16

आज के दिन दिल्ली में एक बलात्कार हुआ था . इसके बाद वर्मा आयोग की सिफारिशों के आधार पर कानून में नयी धारा जोड़ी गयी .जिसके अनुसार अधिकार प्राप्त स्तिथी में पुरुष यदि अपनी अधीनस्थ महिला के साथ यौन शोषण करता है तो महिला की रिपोर्ट तुरंत लिखी जायेगी और महिला के बयान को ही आरोपी के विरुद्ध गवाही माना जायेगा .


अभी हाल में ही तरुण तेजपाल को इसी धारा के तहत जेल में डाला गया है .


सोनी सोरी के मामले में ठीक यही धारा लागू होती है . वह पुलिस अधीक्षक अंकित गर्ग की अभिरक्षा में थी .अंकित गर्ग ने उसके गुप्तांगों में पत्थर भर दिये . सोनी सोरी ने सुप्रीम कोर्ट को इसकी सूचना दे दी. कोलकाता के सरकारी अस्पताल ने सोनी सोरी के गुप्तांगों से पत्थर निकाल कर सर्वोच्च न्यायालय के सामने रख दिए .

सर्वोच्च न्यायालय ने आज तक अंकित गर्ग के विरुद्ध प्राथमिक रिपोर्ट लिखने का आदेश नहीं दिया .


छत्तीसगढ़ के सरगुजा की लेधा नामकी आदिवासी महिला के गुप्तांगों में पुलिस अधीक्षक कल्लूरी ने मिर्चें भर दी थीं . थाने में पुलिस वालों ने महीना भर लेधा के साथ बलात्कार किया . कल्लूरी ने केस वापिस करवाने के लिए लेधा के परिवार का अपहरण कर लिया .

लेधा अब मजदूरी कर के अपना पेट पालती है .कल्लूरी को वीरता का प्रमोशन मिल गया .


उड़ीसा की आदिवासी लड़की आरती मांझी के साथ पुलिस वालों ने सामूहिक बलात्कार किया . आरती मांझी पर सात फर्ज़ी केस बना कर जेल में डाल दिया . आरती मांझी सातों मामलों में बरी हो गयी है .

पुलिस वालों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है .


छत्तीसगढ़ की कवासी हिड़मे के साथ थाने में पुलिस वालों ने इस बुरी तरह यौन शोषण किया कि उसका गर्भाशय बाहर आ गया . हिड़मे सात साल से जेल में है . हिड़मे की अभी आयु बाईस साल है . प्रतारणा के समय वह मात्र पन्द्रह साल की थी .


क्या एक देश का कानून अलग अलग समुदाय के लिए अलग अलग तरह से काम करता है ?


अगर आप इस बात को सहन कर लेते हैं कि देश का कानून अलग अलग लोगों के लिए अलग अलग तरह से ही काम करेगा तो ऐसे पक्षपात पूर्ण कानून को इस देश के करोड़ों लोग अपना कानून कैसे मानेंगे ?


हम चाहते हैं कि कानून का राज आये . लेकिन अगर आप अपने कानून को खुद ही लागू करने में हिचकिचाते हैं तो पूरे देश में कानून का राज कैसे लागू होगा ?


ये कानून आदिवासी इलाकों में कब लागू होगा

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Palash Biswas
http://beyondheadlines.in/2013/12/muslim-protest-stalls-taslima-nasreen-serial/

Muslim Protest Stalls Taslima Nasreen Serial

beyondheadlines.in

Launch of Indian TV serial scripted by controversial Bengali author deferred overs fears of unrest. Shaikh Azizur Rahman The planned launch of an Indian television serial scripted by a Bangladeshi-...

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Himanshu Kumar

8 hours ago near Delhi ·

  • सारा समाज मानता है कि बलात्कार वर्जित कर्म है .
  • लेकिन जैसे ही बलात्कारी का या पीड़ित का नाम सामने आता है .
  • तुरंत समाज की राय बदल जाती है .
  • ये एक खतरनाक और बदमाशी की बात है .
  • कुछ लोग मानते हैं कि हमारी सेना के जवान बलात्कार नहीं कर सकते .
  • और इरोम शर्मिला तो असल में देश को कमज़ोर कर रही है .
  • कुछ लोग कहेंगे कि अंकित गर्ग नक्सलियों के खिलाफ लड़ रहा है इसलिए सोनी सोरी नामक नक्सली उस पर झूठा आरोप लगा रही है .
  • कुछ लोग कहते हैं कि बड़ी जाति के पुरुष छोटी जाति की महिला से बलात्कार कर ही नहीं सकते और भंवरी देवी झूठ बोल रही है .
  • असल में तो अभी हम पूरी तरह सभ्य ही नहीं हुए हैं .
  • अभी भी हमारी सोच पर हमारी स्तिथी , हमारी जाति , हमारी आर्थिक स्तिथी हावी हो जाती है .
  • तब हमारी सोच सत्य को समझने के नाकाबिल हो जाती है .
  • यह बहुत लंबे समय से हमारे चिंतन का दोष रहा है .
  • लेकिन सत्य तो परिस्थिति , जाति , सम्प्रदाय , राजनैतिक विचारधारा से मुक्त होता है .
  • साहसी बनिए , समाज को आगे ले जाइए , परिस्थिति से मुक्त सत्य वैज्ञानिक चिंतन करना प्रारम्भ कीजिये .
  • वरना आप भी हमेशा एक तरह के साम्प्रदायिक ही बने रहेंगे .
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    • Surendra Grover, Samit Carr, Uday Prakash and 187 others like this.

    • Shri Roy Dard ki charcha, vyakhya ke sath sath thos nidaan ko milkar anjam diya jaay.

    • 8 hours ago via mobile · Like

    • Shamim Shaikh जिनके पास ताक़त है वो ग़रीब के साथ अपना अधिकार समझते हुए सब कुछ ग़लत से ग़लत कर जाते हैं, और फिर सोचते हैं,लोग उनके बारे में कुछ न कहें. भ्रष्ट विचार से ग्रस्त लोगों की सोच न्याय का कत्ल कर रही है.

    • 6 hours ago · Like · 3

    • Parmanand Arya भंवरी देवी के प्रकरण में ये बात तो फैसले के दौरान हमारे माननीय न्यायधीश ने ही कही थी कि उच्च जाति के लोग दलित महिला को छू नही सकते लिहाजा वे बलात्कार नही कर सकते हैं...उस महामूर्ख न्याय के देवता को कोई अन्तहीन पौराणिक गाथाए सुनाता..

    • 5 hours ago · Like · 5

    • Mahavir Pandey Samarath ko nahi Dosh Gosayeen

    • about an hour ago via mobile · Like


Satyajit Maurya with Pramod Tayade and 5 others

जिन संघटनो और राजनितिक पार्टियों को दलित होने का गौरव महसूस होता है उन संघटनो और राजनीतिक पार्टिया दलित शब्द का प्रयोग करे हमारी कोई आप्पति नहीं है! लेकिन कोई भी संघटन या राजनीतिक पार्टी अगर बुद्ध, सम्राट अशोक और डॉ. आम्बेडकर के विश्वव्यापी व्यक्तित्व को हिन्दूवादी दलित व्यवस्था के संकीर्ण और संकुचित तंग मानसिकता के डिब्बे में बंद करने या घसीटने का प्रयास करती है तब इन संघटनो और राजनीतिक पार्टियो ने यह समझ लेना चाहिए कि बुद्ध का व्यक्तिमहत्व विश्वव्यापी और विश्‍वसमुदाय के लिये है! सम्राट अशोक और डॉ. आम्बेडकर, यह बुद्ध के श्रेष्ट अनुयायी होने से इनका भी व्यक्तिमहत्व विश्वव्यापी है!


सम्राट अशोक और डॉ. आम्बेडकर, यह बुद्ध के श्रेष्ट अनुयायी होने से यह विश्वमानव के साथ विश्व बौद्ध समुदाय के श्रेष्ठंतम आदर्श पुरुषो में से है! और सम्राट अशोक और डॉ. आम्बेडकर के अनुयाई बौद्ध होने से यह भारत में रहने वाले आंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रेष्ठंतम समाज है! और यह वैभव और ऐश्वय भारत में रहने वाले बौद्धों कोण ही प्राप्त है! यह वैभव-ऐश्वर्य विश्वस्तर पर भारत के अन्य किसी भी चाहे वह ब्राम्हण हो या क्षत्रिय या वैश्य हो या हिन्दू-शुद्र या दलित कहे जाने वाले किसी भी समाज को प्राप्त नहीं है!


डॉ. आम्बेडकर, यह दलित नहीं है और नाही दलितों के नेता यह नाही हिन्दू है और नाही शुद्र! यह उत्तकृष्ट विश्वव्यापी बुद्ध का अनुयायी है! जो संघटन और राजनितिक पार्टी अपने मंचो पर बुद्ध, सम्राट अशोक और डॉ. आम्बेडकर का चित्र लगाकर भारत के बौद्धों को हिन्दू व्यवस्था के दलितो के श्रेणी में घसीटकर बुद्ध. सम्राट अशोक और डॉ. आम्बेडकर इनके साथ इनके बौद्ध अनुयायियों का सरे आम अपमान ना करे! इन्हे निवेदन है कि इन तिन दीप्त युग पुरुषो का चित्र अपने मंच पर ना लगाए और नाही इन तिन दीप्त युग पुरुषो और इनके अनुयायिको के विश्वव्यापी व्यक्तित्व को हिन्दूवादी दलित व्यवस्था के संकीर्ण और संकुचित मानसिकता के तंग डिब्बे में बंद करने का प्रयास नहीं करना चाहिए........

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स‌हमत।


अराजक सोशल मीडिया, दिल्ली की सरकार और मित्र पुलिस

FRIDAY, 20 DECEMBER 2013 11:50

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खुर्शीद अनवर की आत्महत्या ने एक और प्रश्न को जन्मा है कि क्या किसी भी स्त्री के आरोप मात्र लगा देने से पुरुष को बलात्कार का आरोपी मान लिया जाना ठीक है. यदि ऐसा है तो फिर केंद्रीय मंत्री फारुख अब्दुल्ला का कथन 'अब किसी भी महिला से बात करना तक खतरा है.' कोई गलत बयान नहीं. आज नहीं तो कल सभी इसे कहेंगे...

अपूर्व जोशी

इस बार मेरी बात पर चर्चा के लिए तीन मुद्दे. सोशल मीडिया, दिल्ली में सरकार गठन और उत्तराखण्ड की मित्र पुलिस. पहले बात सोशल मीडिया की. खुर्शीद अनवर ने अपने घर की छत से कूदकर जान दे दी. अखबारों ने इसे आत्महत्या का नाम दिया. कानूनी दृष्टि से भी यह आत्महत्या का ही मामला है. लेकिन क्या वाकई इसे आत्महत्या माना जाए या फिर यह हत्या की श्रेणी में आती है?

खुर्शीद अनवर से मुलाकात 'जनसत्ता' के जरिए हो जाती थी. वे अन्य भी अखबारों में लिखते थे या नहीं इसकी मुझे जानकारी नहीं. अनवर एक गैर सरकारी संगठन 'इंस्टीट्यूट फॉर सोशल डेमोक्रेसी' के निदेशक होने के साथ-साथ सुलझी हुई सोच के व्यक्ति थे जो किसी भी प्रकार के कट्टरवाद का विरोध करते थे.

उनकी धर्म निरपेक्षता को समझने के लिए उनका जनसत्ता में 12 दिसंबर को प्रकाशित लेख 'आतंकी गठजोड़ की शिनाख्त' पढ़ा जाना जरूरी है. अनवर लिखते हैं कि 'रवांडा की राजधानी किगाली में स्थित मुख्य मस्जिद के इमाम ने रवांडा की सारी मस्जिदों के नाम पैगाम भेजा-अल्लाह की मर्जी है कि मजहब का फर्क किए बिना इंसानी खून बहने से रोके. एक इस्लाम यह है तो दूसरा इस्लाम नाइजीरिया में अल-कायदा समर्थित बोको हराम के हाथों तेजी से पनप रहा है.

बोको हराम के सरगना अबू बक्र शेकाऊ के शब्दों में 'मुझे अल्लाह के नाम पर कत्ल करने में वैसा ही मजा आता है जैसा कि मुर्गी या किसी जानवर को मारने में आता है.' खुर्शीद अनवर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र रह चुके थे. उन पर एक एनजीओ कार्यकर्ता ने आरोप लगाया था कि उन्होंने सितंबर माह में इस लड़की को अपने घर खाने पर बुलाया, दोनों ने मदिरापान किया, लड़की इसके बाद अपने होश खो बैठी. होश आने पर उसे पता लगा कि उसके साथ खुर्शीद ने बलात्कार किया है.

बकौल पीडि़ता उसने इस प्रसंग का जिक्र अपने कई सहयोगियों से किया, लेकिन सभी ने उसे पुलिस में न जाने की सलाह दी. यकायक ही यह मामला सोशल मीडिया के चलते सुर्खियों में तब्दील होने लगा. एक न्यूज चैनल ने इसे 'प्रमुखता' से दिखाया. राष्ट्रीय महिला आयोग ने मीडिया रिपोर्ट के बाद दिल्ली पुलिस को मुकदमा दर्ज करने में निर्देश दिए. खुर्शीद अनवर ने भी अपना पक्ष रखा. जैसा समाचार पत्रों के जरिए पता चला है.

अपने खिलाफ दुष्प्रचार से खुर्शीद बेहद परेशान थे. लेकिन ज्यादा मानसिक पीड़ा उन्हें सोशल मीडिया से हुई. फेसबुक में अपनी वॉल पर मैंने एक जानी-मानी लेखिका का कमेंट पढ़ा. चूंकि मुझे पूरा प्रकरण पता नहीं था, इसलिए मैंने उनसे पूछना चाहा कि 'मामला आखिर है क्या?' लेकिन मेरा प्रश्न फेसबुक ने रिजेक्ट कर दिया. यह लिखकर कि 'यह पोस्ट अब विदड्रा कर ली गई है.'

इसके तुरंत बाद ही खुर्शीद अनवर की आत्महत्या का समाचार आया. यानी आत्महत्या की जानकारी मिलने के साथ ही फेसबुक पर महिला अस्मिता, अधिकार आदि के लिए दहाड़ने वालों ने डरकर अपने कमेंट गायब करने शुरू कर दिए. और कैसे- कैसे कमेंट! सीधे-सीधे अनवर खुर्शीद को कामुक, बलात्कारी इत्यादि विशेषज्ञों से नवाजा गया. किसी ने में भी आरोपी का पक्ष जानने का प्रयास किया हो, ऐसा उन कमेंट्स को पढ़कर लगता नहीं.

हर कोई न्यायाधीश की भूमिका में. हर किसी के पास असीमित अधिकार-गलियाने के, गरियाने के. हर कोई स्त्री-अस्मिता का रक्षक. खुर्शीद अनवर सोशल मीडिया के प्रहारों को झेल न सके. इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर सोशल मीडिया में फैल चुकी अराजकता को सामने लाने और इस 'हिंसक प्रवृत्ति' पर रोक लगाने के लिए कुछ कदम उठाने पर विचार करने की जरूरत पर उन सभी का ध्यान आकर्षित किया है, जो इस माध्यम के वर्तमान स्वरूप को लेकर चिंतित हैं.

खुर्शीद अनवर की आत्महत्या ने एक और प्रश्न को जन्मा है कि क्या किसी भी स्त्री के आरोप मात्र लगा देने से पुरुष को बलात्कार का आरोपी मान लिया जाना ठीक है. यदि ऐसा है तो फिर केंद्रीय मंत्री फारुख अब्दुल्ला का कथन कि 'अब किसी भी महिला से बात करना तक खतरा है' कोई गलत बयान नहीं. आज नहीं तो कल सभी इसे कहेंगे.

'लिव इन रिलेशनशिप' में महीनों साथ रह रहे बालिग स्त्री-पुरुष के संबंध अचानक बलात्कार की परिधि में कैसे आ सकते हैं? लेकिन ऐसा रोज हो रहा है. बगैर पुख्ता सबूत किसी पर भी आरोप लगाए जा सकते हैं, जेल भेजा जा सकता है, भेजा जा रहा है. ऊपर से अराजक सोशल मीडिया. आखिर कहां जा रहे हैं हम और हमारा समाज?

दूसरी बात जिस पर इस समय पूरे देश की निगाहें टिकी हैं, वह है 'आम आदमी पार्टी' का दिल्ली में सरकार बनाने या नहीं बनाने को लेकर. अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में 'आप' ने दिल्ली विधानसभा के चुनावों में शानदार प्रदर्शन कर सभी को चकित कर दिया. आम आदमी ने उनकी जीत पर जश्न मनाया, मना रहा है तो मुख्यधारा के राजनीतिक दलों में भारी बेचैनी है.

केजरीवाल को भाजपा और कांग्रेस दोनों ही, अपना नैसर्गिक शत्रु मानने लगे हैं. दरअसल अरविंद की राजनीति को कांग्रेस-भाजपा ही नहीं, बल्कि लगभग सभी राजनीतिक दल पचा नहीं पा रहे. उन्हें बंद कमरों में डील करने की आदत रही है. समर्थन देने-लेने के लिए कीमत देने-लेने के आदी हमारे राजनीतिक दल 'आप' की पारदर्शी नीतियों को लेकर भयभीत हैं. इसके चलते नाना प्रकार के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं 'आप' को बदनाम करने के लिए.

केजरीवाल के समक्ष बड़ा धर्मसंकट है. यदि सरकार बनाते हैं तो उन्हें तुरंत ही भाजपा के दुष्प्रचार का शिकार होना पड़ेगा. कांग्रेस की बी-टीम कह उन्हें पुकारा जाने लगेगा. यदि सरकार नहीं बनाते तो अपरिपक्व,अराजनीतिक, अव्यवहारिक प्रतिक्रियावादी आदि संबोधनों से उन्हें नवाजा जाना तय है. शायद इसीलिए केजरीवाल सरकार गठन को लेकर खास उत्साहित नहीं हैं.

वे हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं. मैं समझता हूं 'आप' की सरकार दिल्ली में बनने जा रही है. अरविंद के नेतृत्व में बनने वाली यह देश में पहली ऐसी सरकार होगी जिसके गठन को लेकर विरोधी ज्यादा सक्रिय रहे. इसलिए नहीं कि वे जनता की भावनाओं का सम्मान करने की नीयत रखते हैं, बल्कि इसलिए कि ऐसा होने से उनके राजनीतिक हितों को उनकी दृष्टि में फायदा पहुंचता है.

भाजपा को यह (कु) प्रचार करने का मौका मिलता है कि केजरीवाल और कांग्रेस में पहले से ही गुप्त समझौता था. कांग्रेस को ताजातरीन मिली हार से उबरने के लिए वक्त मिलता है. अपनी आदत अनुसार वे जब चाहेंगे सरकार गिरा ही देंगे. अरविंद इन दोनों ही दलों की नीयत और इनके मनसूबों को भली-भांति समझ रहे हैं. इसलिए वे चाहे छह महीने ही सत्ता में रहें, लेकिन इतना कुछ कर जाएंगे कि अगले चुनाव में दिल्ली की जनता उन्हें पूर्ण बहुमत से सत्ता की कुंजी सौंपेगी. ऐसा मेरा विश्वास है.

तीसरी बात अपने उत्तराखण्ड की. अपने गठन से कुशासन और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुके राज्य में नौकरशाह किस हद तक बेलगाम है, इस पर बहुत कुछ लिखा जा चुका है, लिखा जा रहा है लेकिन किसी को कोई फर्क पड़ता है. राज्य की पुलिस स्वयं को 'मित्र पुलिस' कहती है. यानी आमजन की दोस्त, हमसखा. हकीकत इसके ठीक उलट है.

इसका नवीनतम उदाहरण मेरे एक परिचित के साथ हुआ 'हादसा'. पेशे से चार्टेड एकाउंटेट, मेरठ निवासी गौरव मित्तल अपने परिवार जिसमें उनके वृद्ध माता-पिता भी थे छुट्टियां मनाने 'देवभूमि' के लिए निकले. उनका गंतव्य था मेरा शहर रानीखेत.

बेचारे इस इरादे से निकले थे कि महानगरों की टेंशन से दूर कुछ समय पहाड़ों की शांत वादियों में बिताएंगे, जिससे की मन को शांति मिल सके और देवभूमि में ऊर्जा से वापस लौटें. हुआ इसके ठीक उलट. मेरे पास 14 दिसंबर की शाम करीब चार बजे गौरव का फोन आया कि भाई साहब एक मुसीबत में फंस गया हूं, मदद करें. पूछने पर उन्होंने बताया कि भवाली चैक पर उनकी गाड़ी को स्थानीय पुलिस ने पकड़ लिया है. पुलिस का कहना है कि उन्हें डीआईजी ऑफिस में संदेश मिला है कि आपकी गाड़ी ने पीछे कहीं कोई एक्सीडेंट किया है.

गौरव के मुताबिक चूंकि ऐसा कुछ हुआ ही नहीं, इसलिए उन्हें लगता है 'उगाही' के लिए उन्हें तंग किया जा रहा है. कुछ देर चक-चक झिक-झिक के बाद गौरव को जाने दिया गया. मुझे लगा मामला समाप्त, लेकिन फिर से फोन बज उठा. अब तक गौरव खैरना पहुंच चुके थे. उन्होंने बताया यहां एक बार फिर उन्हें रोक लिया गया है. गाड़ी को वापस भवाली ले जाया जा रहा है. गौरव दूसरी गाड़ी में रानीखेत निकल गए.

जिस गाड़ी में एक्सीडेंट की बात हो रही थी, उसे उनका ड्राइवर पुलिस के साथ वापस भवाली ले गया. भवाली में ड्राइवर को स्थानीय लोगों ने घेर लिया. उसे बताया गया ये सब ज्यूलीकोट के निवासी हैं, जहां उनकी गाड़ी ने एक मोटर साइकिल वाले को चोट पहुंचाई. अब शुरू हुआ लेन-देन का खेल. पच्चीस हजार की मांग रखी गई. धमकी मिली कि रुपया न देने पर गाड़ी ज्यूलीकोट ले लाई जायेगी और वहां गाड़ी को तोड़ा जायेगा, ड्राइवर की भी मरम्मत होगी.

बकौल गौरव पुलिस मूकदर्शक बनी रही. धमकी का काम कुछ युवाओं के हवाले रहा. गौरव ने पुलिस से फोन पर बात कर अनुरोध किया कि वे गाड़ी-ड्राइवर को थाने से जाकर केस दर्ज कर लें, कम से कम मारपीट-तोड़-फोड़ से बचा जाए. लेकिन मित्र पुलिस ने ऐसा कुछ नहीं किया. इस बीच मैंने अपने स्तर पर प्रयास किए. पहला फोन कांग्रेसी नेता नंदन सिंह घुघतियाल को किया. नंदन मेरे मित्र हैं. उन्होंने तुरंत एसएसपी नैनीताल से संपर्क करने का आश्वासन दिया. एक घंटा बीत गया लेकिन उनका फोन नहीं आया.

मेरा दूसरा फोन गया राज्य की वित्त मंत्री डॉ. ब्इंदिरा हृदयेश को. वे कैबिनेट बैठक में थी, बात न हो सकी. इस बीच ड्राइवर पर दबाव बढ़ता गया. कुछ समय पश्चात डॉ. हृदयेश से बात हुई. उन्होंने भी तुरंत एक्शन का भरोसा दिलाया. उनके पीए ने कुछ समय बाद सूचना दी कि एसएसपी फोन नहीं उठा रहे हैं, प्रयास जारी है. गौरव का फिर फोन आया कि मामला ज्यादा बिगड़ रहा था, इसलिए दस हजार दे जान छुड़ा ली है. मैं खामोश रहा.

कुछ समय बाद नंदन फर्त्याल का फोन आया कि एसएसपी 'जिम' में थे इसलिए बात अब हो पाई है. मैंने उन्हें धन्यवाद देते हुआ बताया कि ले-दे कर मित्र पुलिस ने मामला निपटा दिया है. इंदिरा जी का भी फोन आया कि एसएसपी से बात हो गई है. वे जानकारी ले रहे हैं. उन्हें भी मैंने धन्यवाद देते हुए जानकारी दी कि मामला निपट गया है. इंदिरा जी और नंदन भाई ने नाराजगी जताई. आश्वासन दिया कि ऐसा कैसे? अभी कार्यवाही करते हैं. एसएसपी ने भी गौरव से बात कर जानकारी लेनी चाही कि रुपए किसे दिए गए.

गौरव वापस मेरठ लौट आए. अपने माता-पिता की सख्त हिदायत के साथ कि अब कभी देवभूमि जाने का नाम न लेना. एसएसपी ने क्या कार्यवाही की इसकी बाबत न तो इंदिरा जी और न ही नंदन घुघतियाल ने कुछ मुझे बताया. बताते भी शायद तब जब कुछ कार्यवाही हुई होती.

प्रथम दृष्टया यह एक बेहद छोटी घटना है, लेकिन इसके कई निहितार्थ हैं. पहला भ्रष्टाचार को लेकर हमारे नेताओं और अफसरों की उदासीनता है. दूसरा नौकरशाहों का एटीट्यूड है जो राज्य की सबसे ताकतवर मंत्री के फोन तक को अपनी सुविधानुसार उठाते हैं. तीसरा एक पर्यटक की व्यथा है, डर है जो उसे कभी भी देवभूमि न जाने की सोच तक ले जाती है. शायद इसीलिए ऐसे स्पष्ट संकेत उत्तराखण्ड से मिल रहे हैं कि यदि आज चुनाव हो जाएं तो जैसा जनादेश दिल्ली की जनता ने दिया, कुछ वैसा ही उत्तराखण्ड में भी होगा.अपूर्व जोशी द संडे पोस्ट के सम्पादक हैं. यह लेख वहीं से साभार.

http://www.janjwar.com/2011-05-27-09-06-02/69-discourse/4622-arajak-social-media-delhi-kee-sarkaar-aur-mitra-police-by-apoorva-joshi-in-janjwar


Tehelka

'I Went Without Water For Four Days Last Summer'


The residents of Sanjay Colony, like those of many unauthorised settlements in Delhi, suffer from a severe lack of water and sanitation facilities | http://bit.ly/1dNhkOb

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[LARGE][LINK=/vividh/16667-2013-12-20-05-43-24.html]किसान भूख से हार गया और मध्यवर्ग माइक्रोवेव से[/LINK] [/LARGE]


[*] [LINK=/vividh/16667-2013-12-20-05-43-24.html?tmpl=component&print=1&layout=default&page=][IMG]/templates/gk_twn2/images/system/printButton.png[/IMG][/LINK] [/*]

[*] [LINK=/component/mailto/?tmpl=component&template=gk_twn2&link=b9586a63986badef11e910041dbccb120c9870a9][IMG]/templates/gk_twn2/images/system/emailButton.png[/IMG][/LINK] [/*]

Details Category: [LINK=/vividh.html]विविध[/LINK] Created on Friday, 20 December 2013 11:13 Written by कौशल किशोर                                                                      'एक डूबते जहाज की अन्तर्कथा' मध्यवर्गीय विडम्बनाओं का उपन्यास है। जैसे प्रेमचंद के कफन व गोदान कोई आशा नहीं जगाते, वैसा ही कुछ इस उपन्यास में भी है। कोशिश है कि यह समाज का आईना बने और परिवर्तन की गहरी चाह पैदा करे। इसमें मध्यवर्ग पर लिखते हुए पूरे समाज पर बातचीत की गई है। औपन्यासिक प्रविधि में सीधे संवाद करने की कोशिश की गई है। डूबता जहाज मध्यवर्ग का रूपक है जो भूमंडलीकरण के सागर में गोते लगा रहा है। यह नव उदारवाद की फौज बन गया है। यह बात कथाकार व उपन्यासकार रवीन्द्र वर्मा ने आज अपने नये उपन्यास 'एक डूबते जहाज की अन्तर्कथा' पर आयोजित परिसंवाद में कही। परिसंवाद का आयोजन आज लखनऊ विश्वविद्यालय के एपी सेन हाल में जन संस्कृतिमंच और उत्कृष्ट केन्द्र, हिन्दी विभाग द्वारा किया गया। इसकी अध्यक्षता करती हुई वरिष्ठ कवयित्री व पत्रकार वन्दना मिश्र ने कहा कि रवीन्द्र वर्मा का यह उपन्यास सामाजिक व राजीतिक उपन्यास है। यह आज की समस्याओं को गहरी संवेदना के साथ पकड़ता है, छोटे छोटे डिटेल्स हैं जैसे वृद्धावस्था का अकेलापन, भूख की समस्या, किसानों की अत्महत्या, पिता का चरित्र, नरेगा, भ्रष्टाचार आदि। इसकी ताकत रवीन्द्र जी की भाषा है जो बहुत कुछ बतकही की शैली जैसी है। रवीन्द्र वर्मा के इस उपन्यास पर बोलते हुए वरिष्ठ आलोचक वीरेन्द्र यादव ने कहा कि रवीन्द्र वर्मा अपनी औपन्यासिक कृतियों में मध्यवर्ग का क्रिटिक रचते हैं। नवउदारवाद के साथ सांप्रदायिकता व कट्टरपंथ का जो जो गठजोड़ है उस पर उनकी निगाह रही है। पूंजीवादी व्यवस्था में रूपान्तरण हुआ है। नेहरू मॅडल से लेकर भूमंडलीकरण तक की पूंजीवाद की इस यात्रा का प्रभाव मध्यवर्ग की भूमिका पर हुआ है। उसकी जीवन शैली में बदलाव आया है। इस बदलाव ने उसे देश व समाज के सरोकारों से विछिन्न कर दिया है। इस मध्यवर्ग से वही आशा नहीं की जा सकती है जो कल थी। ऐसा भूमंडलीकरण की वजह से हुआ है। रवीन्द्र वर्मा के उपन्यासों में यह यथार्थ पहले भी आया है, यहां तक कि कई उपन्यासों के पात्र भी मिलते जुलते हैं। हम आशा करते हैं कि रवीन्द्र वर्मा अपने आगे की रचनाओं में इस अनुभव संसार का अतिक्रमण करेंगे। कवि और आलोचक चन्द्रेश्व का कहना था कि यह उपन्यास बड़े सूक्ष्म तरीके से कई बातें कहता है। यह डूबता जहाज मध्यवर्ग का है। यह चिरगांव से गुड़गांव की यात्रा करता है। इस यथार्थ को सामने लाता है कि मध्यवर्ग उपभोक्तावाद का गुलाम बन गया है। किसान भूख से हार गया और मध्यवर्ग माइक्रोवेव से हार गया। युवा आलोचक व लविवि में हिन्दी के प्रवक्ता प्रो रविकान्त ने कहा कि यह उपन्यास मध्यवर्ग का नहीं, उच्च मध्यवर्ग का आख्यान है। गुड़गांव से चिरगांव की यह यात्रा वास्तव में ग्लोबल गांव की यात्रा है। देश का अमेरीकीकरण हो रहा है। मध्यवर्ग अपने सपने इसी के इर्द गिर्द देखता है। रवीन्द्र वर्मा का उपन्यास इसी की अर्न्तकथा है। कथाकार शकील सिद्दीकी का कहना था कि इस उपन्यास की भाषा बड़ी समृद्ध है। रवीन्द्र वर्मा ने इस उपन्यास के द्वारा अपने समय का आख्यान प्रस्तुत किया है। 'निष्कर्ष' के संपादक गिरीश चन्द्र श्रीवास्तव का कहना था कि मध्यवर्ग के अन्दर जिस तरह संवेदनाएं शुष्क व निर्मम हुई हैं, उस पर यह प्रहार करता है। भूमंडलीकरण में मध्यवर्ग का जो रूप सामने आया है वह नकारात्मक ज्यादा है। उसके अन्दर के अन्दर लोभ व लालच की संस्कृति ने अपनी जगह बनाई है। उपन्यास में इसकी अभिव्यक्ति है। प्रो रमेश दीक्षित का कहना था कि रवीन्द्र वर्मा मध्यवर्ग की कुंठाओं, स्खलन के प्रामाणिक लेखक हैं। यह उनके तमाम उपन्यासों में देखा जा सकता है। यह उपन्यास उस मध्यवर्ग का आख्यान है जो जमीन और अपनी जड़ों से कटा हुआ है, जो अमरीका में अपना भविष्य देखता है।   अपने संयोजकीय वक्तव्य में कवि कौशल किशोर ने कहा कि रवीन्द्र वर्मा का यह उपन्यास लघु है लेकिन इसका फलक बड़ा है। यह हमारे समय के खास दौर को सामने लाता है। यह न सिर्फ डूबते जहाज की नियति का बयान करता है बल्कि इस पर सवार यात्रियों की नीयत को सामने लाता है। यह मध्यवर्ग के द्वन्द और सपने का अख्यान है जो अभाव, कुंठा और लालच से निर्मित हो रहा है। इस अर्थ में रवीन्द्र वर्मा का यह उपन्यास आज के दौर का अत्यन्त महत्वपूर्ण उपन्यास है। परिसंवाद को भगवान स्वरूप कटियार, प्रताप दीक्षित, राकेश, उषा राय, केके वत्स आदि ने भी संबोधित किया। इस मौके पर नाटककार राजेश कुमार, कवयित्री प्रज्ञा पाण्डेय व विमला किशोर, उपन्यासकार शीला रोहेकर, 'रेवान्त' की संपादक अनीता श्रीवास्तव, कवि वी एन गौड़, रवीन्द्र कुमार सिन्हा, रेणु बाला, इंदु पाण्डेय आदि सहित लखनउ विश्वविद्यालय के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। [B]कौशल किशोर[/B] [B]संयोजक, जन संस्कृतिमंच, लखनऊ[/B] [B]09807519227 [/B]


H L Dusadh Dusadh

मित्रों !आज के जनसत्ता में सत्येन्द्र रंजन ने अपने एक लेख में थोड़े से शब्दों में 'आप'का चरित्र उजागर करते हुए लिखा है-'दक्षिणपंथी रुझान वाली सामाजिक रूप से अनुदार,भ्रष्टाचार को भावनात्मक मुद्दा बनाकर जनाक्रोश का लाभ उठाने वाली ,राजनीतिक विमर्श को सतही और स्तरहीन बनाने वाली संपन्न पृष्ठभूमि से आये लोगों की एक पार्टी...'साथियों अत नहीं आपको कैसा ;लगा किन्तु मुझे तो लगता है कि सत्येन्द्र जी ने 'आप' निर्भूल निर्भूल टिपण्णी की है.इसके लिए मैं तो उन्हें बधाई डे रहा हूँ और आप?

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Sunil Khobragade with Dinesh Kapse and 7 others

Preet Bharara belongs Democratic Party that is of Barak Obama.he is eyeing on mayoral post of New York city.for this he is going to contest from Manhattan area.If we examin the demographics of this area we will see that there is 65.2% of the population is of White Americans and 25.8% is of Hispanic or Latino origin means Whites but not of American origin. apart from this there are 18.4% Black or African American, 12.0% Asian Manhattan has the second highest percentage of non-Hispanic Whites (48%).from this demographical figures we can learn that he is mostly depend on white voters for his win.among 12.0% Asians and 25.8% Hispanics most of them are illegal immigrants.the bill for regularization of these illegal immigrants is being pushed in American house by Democratic Party but being strongly opposed by Republicans.calculating all this political reasons Preet Bharara wants to gain sympathy from Hispanics and at the same time he wants to appease American whites thats why he targets high profile Asians to prosecute and shows that he is more American than Americo-Asian.after all it is all vote bank politics like India

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Himanshu Kumar

बलात्कारी कोई भी हो सकता है . बलात्कार को अनैतिक कहने वाला धर्मगुरु भी , बलात्कार के विरुद्ध मुहीम चलाने वाला पत्रिका का संपादक भी , और महिला के मदद मांगने पर उससे बयान लेने आया पुलिस वाला भी .


पुरुषवाद को पूरी तरह नंगा होने दो दोस्तों , इससे कुछ दिन पुरुषों को तकलीफ तो होगी , लेकिन इसके बाद जो समाज बनेगा वो खुशनुमा , स्वस्थ और स्वच्छ होगा .


इसी में सबका हित है महिलाओं का भी और पुरुषों का भी .

चंडीगढ़ : नाबालिग लड़की ने पांच कांस्टेबलों पर रेप का आरोप लगाया, दो गिरफ्तार

khabar.ndtv.com

चंडीगढ़ पुलिस के दो कांस्टेबलों को महीनों तक एक किशोर लड़की का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। ये लोग उसे गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी देकर उसका यौन उत्पीड़न कर रहे थे।

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Vidya Bhushan Rawat

In Hathgaon today from where our Humanise India initiative against caste discrimination, untouchability, superstition anf gender prejudices start. Birth place of late Ganesh shankar vidyarthy who was killed for as he spoke foe mutual trust and sanity among different communities.

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Uttam Sengupta via Chandrashekhar Tibrewal

Are foreign services of other countries equally shocking ? Just curious.

Diplomatic Abuse of Servants: Not Just for Indians | The Dissenter

dissenter.firedoglake.com

News reports out of New York highlight the arrest of an Indian consular official for allegedly underpaying her domestic servant, and for misrepresenting

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Shamshad Elahee Shams

Faqir Jay 'शराबनोशी में मुब्तला ऐसे बदमिजाज शख्स की मौत से मै भी खुश हूँ .वह प्रायः मुझे 'चंडाल ' कह कर गाली देता था क्यूंकि मै छोटी जाति का हूँ .कबीर कहते है --भला हुआ जो मटकी फूटी .गरीब और अमीर की लड़ाई में ज्यादातर लोग अमीर का पक्ष लेते हैं'.

उपरोक्त कथन सदी के महान बहुजन चिन्तक फ़कीर जय के मुख मंडल से मुसाफिर बैठा साहब की वाल पर निकला, खुर्शीद भाई आपका आंकलन सही था. हमारे बीच ऐसे चंडाल भी है जो लाशो पर नृत्य करना नहीं भूलते.

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Jagadishwar Chaturvedi

"आप" पार्टी जैसाकि हमारा पहले से अनुमान था अंततः सरकार बनाने जा रही है । मार्क्स याद आ रहे हैं । उन्होंने लिखा था कि पूँजीवाद की वास्तविकता है कि अमूमन जो इच्छा होती है उसके अनुरूप काम नहीं मिलता । घटनाएँ इच्छित दिशा में घटित नहीं होती । "आप"की इच्छा थी कि वह कांग्रेस से समर्थन नहीं लेंगी लेकिन समर्थन लेकर सरकार बनानी पड़ रही है , अन्ना हज़ारे की इच्छा थी कि सरकारी लोकपाल का समर्थन नहीं करेंगे लेकिन करना पड़ा । इच्छित सत्य दुर्लभ है वह नसीब वालों को मिलता है । केजरीवाल अब भारत की दलीय राजनीति में सबसे भ्रष्ट दल के समर्थन से सरकार बनाएँगे और चलाएँगे , यह उनके राजनीतिक जीवन की पहली बड़ी आयरनी है ।

The people have spoken: AAP prepares to form Delhi's next govt

firstpost.com

The AAP has said it has received overwhelming support to form the next government in the national capital.

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S.r. Darapuri shared Satya Narayan's photo.

कोरा विशवास और अंध विश्वास खतरनाक होता है क्योंकि वह दिमाग को कुंद करता है और आदमी को प्रतिक्रियावादी बना देता है.- भगत सिंह

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धर्मनिरपेक्षता,साम्प्रदायिकता से परे स्त्री की आज़ादी का सवाल

December 20, 2013 at 2:11pm

औरत की आज़ादी और सुरक्षा देश की सबसे बड़ी समस्या है । हम यह मान बैठे हैं कि संविधान में औरत को हक़ दे दिए गए हैं और क़ानून बना दिया गया तो औरत अब आज़ादी से घूम- फिर सकती है ।

औरत की मौजूदा समाज में धर्मनिरपेक्ष और साम्प्रदायिक दोनों ही क़िस्म के लोगों और विचारधाराओं से जंग है । जो यह मान बैठे हैं कि धर्मनिरपेक्ष होना स्त्री के पक्ष में खड़े होना है । यह एकदम ग़लत धारणा है । स्त्री की मुक्ति के लिए दोनों ओर से ख़तरा है । स्त्री को आज़ादी दिलाने के लिए स्त्री के नज़रिए से देखने की ज़रुरत है । धर्मनिरपेक्षता और साम्प्रदायिकता दोनों ही दृष्टियाँ औरत को पुरुष के मातहत रखती हैं । औरत की मुक्ति की यह सबसे बड़ी चुनौती है कि उसे हर क़िस्म के वर्चस्व से मुक्त रखा जाय।

औरत की आज़ादी का पैमाना पुरुष या समाज नहीं ,औरत होगी । समाज की जितनी भी परिभाषाएँ हैं वे पुंसवादी हैं और पुंसवादी पैमानों से औरत की आज़ादी का मूल्याँकन संभव नहीं है । हमारे समाज में हर स्तर पर समानता का मानक पुंसकेन्द्रित है और यह पैमाना बहुत धीमी गति से बदल रहा है ।

कांग्रेस,भाजपा ,बसपा,अन्ना द्रमुक या टीएमसी आदि दलों के सर्वोच्च पदों पर औरत के बैठे होने से ये दल पुंसवाद से मुक्त नहीं हो गए । पद पर बिठाने मात्र से औरत को समानता नहीं मिलती , पद तो संकेत मात्र है , समस्या पद या प्रतिशत की भी नहीं है ।

समस्या यह है कि हम स्त्री दृष्टिकोण से दुनिया देखते हैं या नहीं ? औरतों में बड़ा हिस्सा है जो दुनिया को पुंसवादी नज़रिए से देखता है और दैनन्दिन जीवन में पुंसवादी उत्पीड़न का स्त्री के ख़िलाफ़ मोर्चा खोले हुए है।

औरत पर विचार करते समय औरतों में व्याप्त वैविध्य को भी ध्यान में रखना होगा । परंपरागत नज़रिए से लेकर स्त्रीवादी नज़रिए तक की औरतें हमारे समाज में हैं । हमें सभी क़िस्म के स्त्री दृष्टिकोण के प्रति सहिष्णु भाव पैदा करना होगा । औरतें सुख और आज़ादी से रहें इसके लिए ज़रुरी है कि हम अनपढ से लेकर शिक्षित तक सभी रंगत और सभी जातियों की औरतों के प्रति समानता और सम्मान के नज़रिए से पेश आएँ । औरतों में दो क़िस्म की चुनौतियाँ हैं, पहली चुनौती स्त्री-पुरुष भेद की है और दूसरी चुनौती स्त्रियों में व्याप्त सामाजिक-क्षेत्रीय भेद की है। औरतें पहले औरतों से सामाजिक भेद त्यागकर प्रेम करना सीखें । मसलन ब्राह्मण औरत में निचली जाति की औरत के प्रति भेददृष्टि होती है। यह भेददृष्टि उसमें समानता और सम्मान का सामान्य रवैय्या विकसित नहीं होने देती । यहाँ तक धर्मनिरपेक्षता या हिन्दुत्व भी उसे इसमें मुक्ति मार्ग नहीं दिखाते । स्त्री जितनी घर के बाहर निकलेगी , समाजीकरण की प्रक्रिया में सक्रिय होगी उसकी भेददृष्टि कम होती चली जाएगी । इसके लिए उसे स्त्री मुक्ति की स्त्रीवादी विचारधाराओं और परंपराओं से सीखना होगा ।

Prakash K Ray

I salute the activists of Aam Aadmi Party and Manish Sisodia for standing up for the poor in the slums in Mayur Vihar Area. They have stopped the bulldozers gone to demolish slums.

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Emanul Haque shared Tapas Sinha's photo.

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Afroz Alam Sahil

सिंगरौली पुलिस गोलीकाण्ड : दिल पर हाथ रखकर कहिए कि क्या ये देश आज़ाद है?

अखिलेश की मौत पुलिस अभिरक्षा में हुई है और इसके तमाम प्रमाण मौजूद हैं. पुलिस अभिरक्षा में हुई मौत दरअसल जिले में डीजल और कबाड़ के अवैध कारोबार में पूलिस की संलिप्तता व हिस्सेदारी को छिपाने का प्रयास है. यही नहीं, गोली मारने के पश्चात नकीब को पुलिस ने अस्पताल तक नहीं जाने दिया. अस्पताल ले जाने के प्रयास में लगे नकीब के मामा शमीम खान एवं उन्हें बेरहमी से पीटा गया. शमीम खान आज भी घायल अवस्था में हैं व चलने में असमर्थ हैं. अन्य लोगों को बैढन स्थित जिला चिकित्सालय में भर्ती कराने पहुंचे लोगों पर चिकित्सालय के अन्दर घुसकर पुलीस ने लाठीयां भांजी..... पढ़िए 13 दिसंम्बर 2013 को घटित बर्बरतापूर्ण पुलिस गोलीकाण्ड की पूरी दास्तान... और बेगुनाहों के इंसाफ के लिए इसे अधिक से अधिक शेयर करें.... http://beyondheadlines.in/2013/12/singrauli-police-firing/

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Shirin Shabana Khan shared EU in India's album: EU offers €150,000 to help victims of Muzaffarnagar violence.

Almost 10,000 people living in relief camps across Muzaffarnagar and Shamli districts in the north Indian state of Uttar Pradesh will receive emergency shelter materials such as tents, tarpaulins, ground sheets, foam mattresses and warm blankets, financed by funds from the European Commission, to protect themselves from the bitter cold weather, which has reportedly claimed several lives in the camps. Read full press release @ http://tinyurl.com/ny7qhwa

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Gopikanta Ghosh likes an article on Indiatimes.

Misunderstood

Students disrupt Amartya Sen's lecture over campus suicides - The Times of India

Indiatimes

In fact, some protestors even went to the extent of asking the Nobel laureate to explain why he received a doctorate from a vice-chancellor who resorted to "discrimination" on his campus.

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Ashok Dusadh

''एक नारा था सिहांसन खाली करो की जनता आती है '' प्रभु इतनी जनता एक सिहांसन पर कैसे बैठ पाएगी !! इसलिए जनता आती है सिहांसन ही हटा दो ,दरी बिछा दो ?

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S.r. Darapuri shared a link.

Devyani Khobragade's properties and Adarsh flat

moneylife.in

Devyani Khobragade, the IFS officer and daughter of former IAS officer Uttam Khobragade has properties worth over Rs5 crore, mostly gifted by her father

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Abhijit Kundu via Seema Mustafa

" Selective feminists of the kind who rendered dubious advise to the girl should realise the damage they do to the larger cause. The sympathy and response that the women's movement has virtually extracted from apathetic and indeed hostile society after the Delhi rape case for instance, stands in danger of being diluted with every such evidence of irresponsibility and unaccountability. "

What Khurshid Anwar's suicide should tell the media

m.rediff.com

It is absolutely essential to prevent an atmosphere of trial and execution from being created on the larger issue of sexual assault, so that there can be a dispassionate understanding of every case, instead of irresponsible outpourings on television channels run by unaccountable anchors, says Seema…

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Mumbai: 22 special trains for Narendra Modi's rally on Sunday

Cities | Mid-day.com | Updated: December 20, 2013 12:59 IST

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BJP prime ministerial candidate Narendra Modi speaks at a rally.

Mumbai:  The Bharatiya Janata Party (BJP) has pulled out all the stops to ensure people show up for the rally led by its prime ministerial candidate Narendra Modi. As a result, citizens can expect crowded railway stations this Sunday, when the rally will be held at Bandra-Kurla Complex (BKC).


Nearly 45,000 supporters of Modi and the BJP are expected to attend the rally from different parts of Maharashtra, and also from neighbouring states. In order to ensure smooth travel to Mumbai for them, the BJP has booked 22 special long-distance trains.


In all, the railways have arranged for 44 special trains between December 21 and December 23. People from all over Maharashtra will be coming into the city for the rally and both Central Railway (CR) and Western Railway (WR) would be operating extra trains.


Supporters from neighbouring states will have to come to connecting stations in Maharashtra (see box for details) and then change over to the special trains being run by CR and WR. "We have been asked to run special trains from different places of Maharashtra and get them to Mumbai," said a WR official.


CR will be running 12 trains, while WR will be operating 10 trains on December 21 and get Modi followers for the rally on Sunday morning.


Sources in CR said that the BJP had booked these trains by making full payment as per existing tariffs via the IRCTC. The trains will cover important stations like Thane, Lokmanya Tilak Terminus, Dadar and Chhatrapati Shivaji Terminus (CST) on CR, and Bandra Terminus and Mumbai Central on WR. People would then be transported by local trains or buses to BKC.


According to officials, each train has 18 coaches (1AC, 2AC and 3AC), as well as sleeper coaches. Each train will have a capacity to carry 2,000-2,200 passengers but overcrowding is quite likely.


A senior CR official clarified, "There won't be any rescheduling of existing trains entering Mumbai." Railway authorities will have these trains run between 10 pm and 6 am and follow the same pattern while taking them back to their respective locations on Sundaynight after the rally.


These are being operated as any other holiday special trains that are usually seen during summer, Diwali or Christmas vacations.


Official speak

"If the schedule of other trains would have been affected, then railways wouldn't have given permission. Also, we are in touch with the local police and other authorities to ensure smooth transportation from railway stations for our supporters," said Ashish Shelar, chief of BJP's Mumbai unit.


Connecting people

The BJP has called upon people from Solapur, Latur, Amravati, Parli, Dhamangaon, Aurangabad, Bhusawal, Nasik, Nagpur, Balharshah Junction and other places in the state. Both CR and WR will operate special trains, connecting other special trains run by other railway zones in the neighbouring states. This means that if people are coming from Gujarat, Andhra Pradesh, Karnataka, and Madhya Pradesh, they will alight at the above stations and board these special trains run by CR and WR.


12

Number of trains being run by CR for the event


10

Number of trains being run by WR for the event


44

Number of trains being run by Indian Railways for the event


CR trains

4 trains up to Dadar

3 trains each till CST, LTT

2 trains will go up to Thane


WR trains

4 trains up to Mumbai Central

4 trains up to Bandra Terminus

Dalits Media Watch

News Updates 20.12.13

Students disrupt Amartya Sen's lecture over campus suicides- The Times Of India

http://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/Students-disrupt-Amartya-Sens-lecture-over-campus-suicides/articleshow/27667892.cms

Dalit supporters water-cannoned- Church Times

http://www.churchtimes.co.uk/articles/2013/20-december/news/world/dalit-supporters-water-cannoned

Dalits plan contempt proceedings against Collector- The Hindu

http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-tamilnadu/dalits-plan-contempt-proceedings-against-collector/article5481151.ece

Orissa Revenue Minister questioned on land rights of the poor- The Hindu

http://www.thehindu.com/news/national/other-states/orissa-revenue-minister-questioned-on-land-rights-of-the-poor/article5473327.ece#.UrPwCHMuWMM.gmail

The big challenge- The Hindu

http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-features/tp-fridayreview/the-big-challenge/article5479824.ece

Will Ambedkar statue be a tall order for Modi?- The Times Of India

http://timesofindia.indiatimes.com/city/ahmedabad/Will-Ambedkar-statue-be-a-tall-order-for-Modi/articleshow/27669258.cms

Dalit Literacy Rate Up by 9 pc in Pondy- The New Indian Express

http://www.newindianexpress.com/states/tamil_nadu/Dalit-Literacy-Rate-Up-by-9-pc-in-Pondy/2013/12/20/article1955577.ece

The Times Of India

Students disrupt Amartya Sen's lecture over campus suicides

http://timesofindia.indiatimes.com/city/hyderabad/Students-disrupt-Amartya-Sens-lecture-over-campus-suicides/articleshow/27667892.cms

HYDERABAD: A group of students from University of Hyderabad (UoH) disrupted Nobel laureate Prof Amartya Sen's lecture, demanding that he talk on caste-based discrimination in institutions of higher learning instead of the scheduled topic: 'Are Coffee Houses important for Education?'


The students under the banner of 'Raju-Venkatesh Joint Action Committee', an organization formed to protest suicides of several Dalit students and alleged caste discrimination, disrupted the talk for 15 minutes, soon after Sen announced the topic of his lecture.


After briefly protesting in front of the auditorium, they marched in around 4.30 pm, holding placards that read: 'De-castesize education', 'Counsel the faculty, not the students' and 'Say no to suicides'.Though the protestors, who had black bandages tied around their mouths, initially indicated they would carry out a silent protest against rising suicide rate among students from marginalized sections on campus, events took a turn for the worse soon after Sen introduced the subject of his lecture.


Angry students, raised slogans demanding that Sen, known to preach and live by the teachings of Dr B R Ambedkar, speak on the discrimination against Dalit students on university campuses instead of dwelling on coffee houses, where Dalits seldom set foot.


The protest was the culmination of an online campaign endorsed by 198 people, which had started on December 17, requesting Sen to "address the issue of discrimination in higher education and distinctly explain institutional forms of caste discrimination." Amidst cries of 'Jai Bheem' and 'They all want us to die', the students accused varisty authorities of oppressing Dalit students and driving them to suicide.


In fact, some protestors even went to the extent of asking the Nobel laureate to explain why he received a doctorate from a vice-chancellor who resorted to "discrimination" on his campus.


Even Sen's curt response to their protest, on how agitations should be about "presenting an argument rather than preventing others from speaking," failed to have any impact on the students.


"If I was told earlier to speak on the Dalit issue, I would have done so. But considering I have no idea about this particular issue, it would be outrageous for me to speak on it now. I am not competent to do so," Sen later added.


While the students refused to call off the protest even at the insistence of vice chancellor Ramakrishna Ramaswamy and some faculty members, they finally relented after much persuasion by the university administration.

Church Times

Dalit supporters water-cannoned

http://www.churchtimes.co.uk/articles/2013/20-december/news/world/dalit-supporters-water-cannoned

THE Prime Minister of India has apologised to church leaders in the country after police used batons and water cannons on protesters demanding an end to discrimination against Dalit Christians.

The rally in New Delhi on Wednesday of last week was organised by the Catholic Bishops' Conference of India, the National Council of Dalit Christians, the National Council of Churches in India, and the Church of North India.

Protesters demanded equal rights for Dalit Christians. Dalits were formerly known as "untouchables", and are regarded as the lowest caste in India.

Addressing the rally, the General Secretary for the Church of North India, Alwan Masih, said that the Presidential Order of 1950, which denies equal rights to Christians and Muslims of Dalit origin on the basis of religion, was "violative of the fundamental rights assured by the Constitution of India".

A report from the Church of North India said that, during a peaceful march towards the Parliament House, the police "brutally cane-charged" protesters, before using water cannons to throw "cold and dirty water with unbearable pressure". A number of protesters were "badly injured".

Among the many senior church leaders arrested were Mr Masih and the RC Archbishop of Delhi, the Most Revd Anil Couto. Several monks and nuns were also arrested. The Church reported that this was the first time since 1997 that bishops had been arrested for supporting the Dalit cause.

The day after the protest and arrests, the Prime Minister of India, Dr Manmohan Singh, met church leaders and apologised for the use by the police of batons and water cannons.

Last Thursday, the Revd David Haslam, convener of the Churches Dalit Support Group, said: "This appalling incident shows again how caste discrimination is still all around in Indian society. Daily news briefings tell of threats, beatings, rapes, and house-burning. Dalits - Christian, Muslim, Buddhist or Hindu - remain in constant danger, especially when they stand up to protect their rights."

The Hindu

Dalits plan contempt proceedings against Collector

http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-tamilnadu/dalits-plan-contempt-proceedings-against-collector/article5481151.ece

Dalits in Vellakoil block, who have been fighting to gain rights for unrestricted access to the New Uthamapalayam Mariamman Temple in the locality since 2010, have decided to initiate contempt of court proceedings against the District Collector in Madras High Court.

S. Karuppaiah, convener of the Uthamapalayam temple entry agitation committee, said the move was planned as the Collector, despite a High Court direction to him on September 26, had failed to issue appointment notification to lawyer B. Mohan, who practices in various courts, as special public prosecutor in the case in which Dalits were assaulted by non-Dalits when they tried to enter the temple in 2010. When contacted, Mr Mohan said that he too had taken up the issue with the Collector on the delay in issuing the notification to him.

"Without the Collector issuing the notification under Section 24 (8) of Criminal Procedure Code, I am not able to appear in the court as special public prosecutor in the case. Due to this, "absent" has been marked against my name when the case recently came up for hearing at the Tirupur Principal District and Sessions Court, designated as special court for trial of cases of atrocities against Scheduled Castes and Scheduled Tribes," he pointed out.

The Hindu

Orissa Revenue Minister questioned on land rights of the poor

http://www.thehindu.com/news/national/other-states/orissa-revenue-minister-questioned-on-land-rights-of-the-poor/article5473327.ece#.UrPwCHMuWMM.gmail

Narayan Patro says there is a need to carry out reforms to do justice

Revenue and Disaster Management Minister Surya Narayan Patro had to deal with innumerable questions pertaining to land rights of the marginalised communities in the State here on Tuesday.

The questions were posed by several men and women from the backward regions of the State who attended a meeting organised on the occasion of the release of a report on a study on mining and land rights of the Dalits and marginalised communities. The meeting was organised by the Development Initiative, Bhubaneswar.

Mr. Patro had a tough time in answering the queries that ranged from multiple displacements to land rights for the thousands of landless families in different corners of the State.

While assuring that he would try his best to resolve the land issues that would be brought to his notice, Mr. Patro said the need of the hour was to carry out reforms and bring a change in the system and mindset of those manning the administration to do justice to the landless and displaced people. The Minister lamented that despite the State government making several new laws relating to issuance of record of rights in favour of landless families and rehabilitation of displaced families, a lot was still left to be done to streamline the system to ensure that the benefits reached the marginalised communities.

Stating that land had to be acquired in order to ensure industrial development in the State, Mr. Patro, however, observed that many Central laws were still posing hurdles in the mineral rich regions of the State.

The plight of thousands of families who had been displaced by various projects in the past was also highlighted by the participants who came from different regions of the State. The need for reclaiming of the abandoned mines from where iron ore, coal and other minerals had already been extracted by various government undertakings and private companies was also stressed by the participants so that the people who had lost their land and had been affected by mining could be benefited in the future.

The Minister assured the participants that the government was trying its best to give land to the landless under the Vasundhara scheme, and where no government land was available money was being paid to the families to purchase private land.

The Hindu

The big challenge

http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-features/tp-fridayreview/the-big-challenge/article5479824.ece

Ten years ago, when Rajiv Goswami died due to complications arising out of his self-immolation bid as a student in 1990, online media attributed martyrdom to him. His co-agitators fondly recalled their hero of anti-Mandal protests, as they did the glorious days when police refused to baton them-- 'Yeh andar ki baat hain, police hamare saath hain', was the slogan!

Not police alone, but media also actively collaborated with the anti-reservation public spectacles, in 1990 and on every given occasion. Absence of vocal intelligentsia from the dalit and OBC groups only encouraged the casteism manifested through protest forms scoffing bottom-of-the-hierarchy vocations such as boot polishing and sweeping of roads.

Brazen parade of upper-caste arrogance they were in their form and content, asserted K. Balagopal, one of the very few intellectuals trenchant and unblinking in their support for the millions of oppressed people in the country.

But sane voices such as Balagopal's which could have shamed the agitators by holding a mirror to their undemocratic and greedy aspirations, remained in bulletins from AP Civil Liberties Committee or 'Reservations Protection Forum'.

Thankfully, truth is available now for those seeking it. The newly published compilation of Balagopal's Telugu writings, Reservationlu-Prajaswamika Drukpatham , promises to shred into fine pieces and consign to dust, every celebrated argument against reservations.

It is a collection of 23 carefully edited articles addressing the concerns of oppressed sections including dalits, aadivasis, OBCs, Muslims, and physically challenged.

And the list of whose constricted thought horizons the book seeks to widen includes not only students celebrating misplaced martyrdom, but also university authorities, politicians, policy makers, civil servants, and even judiciary.

Nearly 25 years after the Mandal agitations, relevance of these writings has not waned vis-à-vis the rock-hard impenetrability of the upper-caste ethos still ruling the country. Opposing the skewed interpretation of reservations as electoral hand-outs, Mr.Balagopal asserted the quotas as the democratic right of the multitudes languishing behind in the social order for centuries.

He demystified the concept of 'merit' by problematising the very epistemological grounds it stands on. Apart from 3,000 years of cultural capital, the 'merit' has behind it, learning convenience, caste-based cohesion and unquestioned laws of inheritance with no precondition of merit.

Faith in the court-room justice and in the happy ending it would bring to the sordid tale of discrimination, would take a beating upon reading his piece on OBC reservations in central universities. A finely delineated account of the Sachar Committee report equating Muslims with the Scheduled Castes in all the comparable indicators of human and social development, pits an inescapable argument for extending reservations to them.

From calling universities and higher learning institutions 'Modern Agraharas', to castigating the apex court's judgment against categorization as lacking in wisdom and reason, the posthumously published compendium spares nobody. Chastised on a tad lesser note are OBC groups for opposing Muslim reservations and Mala Mahanadu for opposing categorisation.

Published by Perspectives, the book is recommended for less narcissistic introspection by forward castes; for deprived classes to develop a belief in their rights; for more nuanced understanding of law by judiciary; and for improving the honesty quotient of Indian society.

The Times Of India

Will Ambedkar statue be a tall order for Modi?

http://timesofindia.indiatimes.com/city/ahmedabad/Will-Ambedkar-statue-be-a-tall-order-for-Modi/articleshow/27669258.cms?

AHMEDABAD: A new movement among dalits in Gujarat asking for the world's tallest statue of Babasaheb Ambedkar could test Narendra Modi's political tightrope-walking skills ahead of the 2014 Lok Sabha elections.


Having anointed himself 'Chhote Sardar', the BJP's prime ministerial candidate is in the midst of a record-breaking drive to create awareness about the 182-metre statue of Sardar Patel being built near Narmada dam.


Barely days after a mammoth 'Run for Unity', some 3,000 dalits plan to take to the streets across Gujarat demanding a similar statue for Ambedkar. The rally will be held at Badharka, a village 10 km from Dholka on December 25, the day Ambedkar burnt the Manusmriti in 1927.


In Gujarat, nearly one lakh families from across 3,500 villages covering 14 districts will light lamps at home at 9 pm on December 25. The event is being managed by independent dalit rights groups. Special paraphernalia, matchboxes and candles carrying the message — 'Bharat desh ni sauthi unchi pratima, adhunik Bharat na gadhvaiya, Dr Ambedkar, ej emnu sachu samman' have been distributed in villages.


This is a Gujarat-based movement, but could become a headache for Modi if it spreads to other states as it is known that Sardar and Ambedkar strongly differed on a number of issues, including reservation.


"If the state government can mobilize Rs 2,500 crore for the tallest statue of Sardar from across the country, why can't there be a similar drive for Babasaheb's statue? After all, he stood for equality among all communities and a socially cohesive nation," says Martin Mackwan, founder of Navsarjan Trust, which is spearheading the movement.


Macwan wants a debate on why Ambedkar does not deserve the world's tallest statue. He wants this message of alleged injustice to reach out to the 17% dalit population in the country.

The New Indian Express

Dalit Literacy Rate Up by 9 pc in Pondy

http://www.newindianexpress.com/states/tamil_nadu/Dalit-Literacy-Rate-Up-by-9-pc-in-Pondy/2013/12/20/article1955577.ece

There has been a substantial increase in the literacy rate among the Scheduled Caste people with the literacy rate going up to 77.9 per cent in 2011 from 69.1 per cent in 2001. The rural literacy has seen a jump from 64.3 per cent to 73.9 per cent while the urban literacy has increased from 75 per cent to 83 per cent, according to a presentation given by deputy director of census operations, Puducherry, J Jayapragasam, at a workshop here on Wednesday.

The male literacy rate has gone up from 78.4 per cent to 85.2 percent, while the female literacy rate has increased from 60.1 per cent to 71.1 per cent.

The work participating rate of SC has gone down from 40.2 per cent in 2001 to 38 per cent in 2011. More significantly, in rural areas, the rate has decreased from 44.4 per cent to 39.7 per cent. But in urban areas, it has gone up from 34.9 per cent to 35.9 per cent. While 66 per cent are male workers, 44 per cent are female workers.

A total of 18.98 per cent of the SC population in Puducherry town lives in slums, while 56 per cent of the population lives in slums in Yanam, 9.71 per cent in Mahe and 30.88 per cent in Karaikal.

While cultivators in the general population has declined from 3.18 per cent to 2.71 per cent in the last decade, among the SC population, it has marginally increased from 1.18 per cent to 1.62 per cent.

The literacy rate in slums is 82.37 per cent in Puducherry, 97.18 per cent in Mahe and 83.78 per cent in Karaikal. The agricultural labourers have declined from 55.36 per cent to 39.11 per cent. The percentage of SC population employed in household industry as compared to other industries has increased from 0.83 per cent to 1.03 per cent. In other industries also it increased from 42.63 per cent to 58.24 per cent.

News Monitor by Girish Pant

.Arun Khote

On behalf of

Dalits Media Watch Team

(An initiative of "Peoples Media Advocacy & Resource Centre-PMARC")


Pl visit on FACEBOOK : https://www.facebook.com/DalitsMediaWatch

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Peoples Media Advocacy & Resource Centre- PMARC has been initiated with the support from group of senior journalists, social activists, academics and  intellectuals from Dalit and civil society to advocate and facilitate Dalits issues in the mainstream media. To create proper & adequate space with the Dalit perspective in the mainstream media national/ International on Dalit issues is primary objective of the PMARC.

http://www.kractivist.org/press-release-devyani-khobragades-arrest-labour-law-violation-not-foreign-policy-issue/


PROTEST AT JANATAR MANTART TOMMORROW 2PM


http://www.kractivist.org/event/protest-domestic-workers-in-usa/


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Adv Kamayani Bali Mahabal

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skype-lawyercumactivist

Hey folks, coined this term " Kracktivism ", check out my blog   

http://kractivist.wordpress.com/Kracktivism


Blog for girl child-  http://fassmumbai.wordpress.com/  


Blog for Kashmir -http://kashmirsolidaritymumbai.wordpress.com/


Blog for KKM defence Committee-  http://kabirkalamanch.wordpress.com


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Dalits Media Watch

News Updates 19.12.13

Devyani Dalit, so Centre reacted late: Maya- India Blooms

http://www.indiablooms.com/NewsDetailsPage/2013/newsDetails181213g.php

Public hearing against acquittals of accused of Dalits' massacres- Two Circles

http://twocircles.net/2013dec19/public_hearing_against_acquittals_accused_dalits%E2%80%99_massacres.html

DALIT BODY SLAMS GOVT FOR SILENCE ON ATROCITY PLAINTS- The Pioneer

http://www.dailypioneer.com/state-editions/bhubaneswar/dalit-body-slams-govt-for-silence-on-atrocity-plaints.html

Quota seats to go up under new admission norms, says minister- Deccan Herald

http://www.deccanherald.com/content/375431/quota-seats-go-up-admission.html

Population Growth of SC/ST Higher- The New India Express

http://www.newindianexpress.com/states/odisha/Population-Growth-of-SCST-Higher/2013/12/19/article1953379.ece

Police file FIR against former CMC Commissioner, ex-AEE- The Hindu

http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-karnataka/police-file-fir-against-former-cmc-commissioner-exaee/article5476603.ece

India Blooms

Devyani Dalit, so Centre reacted late: Maya

http://www.indiablooms.com/NewsDetailsPage/2013/newsDetails181213g.php

New Delhi, Dec 18 (IBNS) Bahujan Samaj Party (BSP) supremo Mayawati on Wednesday created a controversy by saying Indian Deputy Consul General Devyani Khobragade, who was arrested on visa fraud charges in New York, is a Dalit and hence the Centre reacted late on the issue.

"I know I should not bring caste into this issue. But it seems the central government reacted late since this girl is a Dalit," Mayawati said in the Rajya Sabha.


"What happened with the girl was inappropriate. The method which the US followed in checking the girl is not acceptable," she said.


Her statement immediately created an uproar in the Upper House of the Indian Parliament with Congress MPs protesting against her remark.


To that, Mayawati said: "Why is the Congress creating a ruckus in Parliament? Let's admit she is a Scheduled Caste."


"We must take up the issue with the US and be firm about it. Also, we need to check our foreign policy."


The father of Devyani Khobragade met Union Home Minister Sushilkumar Shindeon Tuesday and said he was assured of the government's support for his daughter.


"The home minister has said the government is responsible for her security and liberty. The whole government is supporting us and that she was on duty, and hasn't committed any crime," Uttam Khobragade told reporters here after his meeting with Shinde.


He said that what was done to his daughter was absolutely atrocious and that she is liable for diplomatic immunity.


Meanwhile, India on Tuesday started hitting back at the United States over the maltreatment of Devyani Khobragade by taking a clutch of measures against the US diplomats and their families in India with some moves as symbolic as removing barricades outside US embassy in New Delhi.


US diplomats and their families were asked to surrender their identity cards and their airport passes are being withdrawn after it was known that the Indian diplomat was strip searched and put with drug addicts in a cell in USA after her arrest over an alleged visa fraud.


India has asked the US officials here to submit salary details of their staffers and domestic helps they employed here besides seeking tax details of teachers from USA working in India.


India is stopping all import clearances for the American embassy.


Barricades outside the US embassy in Delhi were removed.


While BJP leaders like Yashwant Sinha went to the extent of asking for arresting gay US diplomats in India since the Supreme Court has now once again criminalized gay sex in India, External Affairs Minister Salman Khurshid said they have communicated their dissent strongly.


"Disquiet very, very strongly felt. We have communicated the dissent we feel," said Khurshid.


"It is completely unacceptable. We have put in motion what we believe will be an effective way to address this issue and protect her dignity," he said, adding that "everything that can be done, will be done."


Following reports of ill-treatment of Devyani Khobragade by the New York Police, Shinde and Congress vice president Rahul Gandhi earlier in the day reportedly refused to meet a US Congressional delegation.


According to reports, Devyani Khobragade, who was arrested for alleged visa fraud and handcuffed in public view last week, was allegedly stripped and searched at a police station in New York.


She was also allegedly kept in a lockup with common criminals and drug addicts.


The U.S. Department of State has said Devyani Khobragade does not enjoy immunity from US laws.


"Under the Vienna convention on consular relations, the Indian Deputy Consul General enjoys immunity from the jurisdiction of US courts only with respect to acts performed in the exercise of consular functions," said a spokesperson of the U.S. Department of State.


"We are handling this incident through law enforcement channels. We have a long-standing partnership with India, and we expect that that partnership will continue," the spokesperson said.

Two Circles

Public hearing against acquittals of accused of Dalits' massacres

http://twocircles.net/2013dec19/public_hearing_against_acquittals_accused_dalits%E2%80%99_massacres.html

Bathe massacre survivors submit 5 million signatures to President.

New Delhi: A public hearing was held at Jantar Mantar challenging the series of Patna High Court verdicts that acquitted all accused in massacres by the Ranveer Sena.

The hearing was addressed by survivors and eyewitnesses of the Bathani Tola, Laxmanpur Bathe and Nagari Bazaar massacres, and family members of the victims. A delegation of the massacre survivors was accompanied by eminent citizens and activists, including several writers, intellectuals and journalists, over the past month.

Several survivors of the Laxmanpur Bathe and Nagari Bazaar massacres spoke of their long struggle for justice, battling all the efforts to terrorise them into silence.

"Foetuses were ripped apart from the stomachs of eight women, and flung in the air", said Madhuri from Laxmanpur Bathe, recounting the horror. "We routinely receive threats. When we were making depositions, we were told 'now we have killed 58, we will kill 116 if you say anything'," she added.

"Today those who threatened and murdered us are roaming free. Nitish Kumar and those in power in Delhi should answer: is this justice?" said Rita, another survivor of the Bathe massacre.

Bathani Tola massacre survivor Naeemuddin Ansari, who lost 6 family members in the massacre recalled that President KR Narayanan had in 1997 called the Bathe massacre a 'national shame.' "We hope President Mukherjee too will raise his voice for the cause of justice against this second national shame – the acquittal of all the accused. The High Court refused to believe us, saying that we cannot be 'survivors', we should all have been dead had there been a massacre! Now the very fact that we are alive is being used to deny us justice," he said.

Another survivor Oghraj said, "I have personally identified several among those who led the assault in my village. And now the High Court refuses to believe me, and says I am a liar! We were filled with terror when the murderers were acquitted, fearing retaliations. But now we have decided we just have to fight, we can't turn back".

The jury at the public hearing included Prof. Nandini Sundar of DU, Profs. Sona Jharia Minz and YS Alone of JNU, Prof Nawal Kishor Choudhury of Patna University, and JNUSU VP Anubhuti Agnes Bara, Chittaranjan Singh, PUCL and others. Among those who addressed the gathering were CPI(ML) General Secretary Dipankar Bhattacharya, CPRM General Secretary Taramani Rai, and Atul Dighe of Lal Nishan Party (Leninist).

The proceedings were conducted by Revolutionary Youth Association General Secretary Ravi Rai.

Terming the acquittals a 'massacre of justice', CPI(ML) GS Dipankar Bhattacharya said the erstwhile Laloo-Rabri regime and the current Nitish Kumar regime had betrayed the massacre victims alike, and protected the perpetrators.

The memorandum submitted by the survivors to the President reminded that in 1997, "the Bihar Government was prompted to set up the Justice Amir Das Commission to probe and identify the political leaders backing the Ranveer Sena. This Commission was wound up by the present Bihar Government when it was on the point of submitting its report."

The memo appealed to the President to "ensure the reopening of the Justice Amir Das Commission, or else institute a fresh enquiry commission, and ensure the time-bound submission of its report, so that the political actors implicated in the massacres can be identified and punished."

The Pioneer

DALIT BODY SLAMS GOVT FOR SILENCE ON ATROCITY PLAINTS

http://www.dailypioneer.com/state-editions/bhubaneswar/dalit-body-slams-govt-for-silence-on-atrocity-plaints.html

Coming down heavily on the State Government for its lackadaisical attitude towards atrocities on Dalits, hundreds of people under the banner of the National Confederation of Dalit Organisation (NACDOR) on Wednesday staged a demonstration in front of State Assembly demanding immediate Government intervention in the issues.

"More than 200 Dalit employees working at Bhubaneswar Infosys are being subjected to both mental and physical tortures since last 15 years by Infosys Regional Manager Vaibhab Patel and others. Though an FIR was lodged at the Infosys police station in this regard, the police instead acting against Patel are forcing the complainants to withdraw the complaint," rued NACDOR State president Ashok Kumar Mallick.

Giving an instance of police inaction, Mallick said though a complaint was registered against some villagers of Patana Sahi under the Lingaraj police station for attacking a Dalit boy, Jitu Kandi, and his sister on December 5, the police are yet to arrest them.

"It is seen that political persons like Ministers, MPs and MLAs belonging to the present party in power in the State, besides influential persons and even police personnel are involving themselves in heinous atrocities against Dalit people," said Mallick.

Seeking Chief Minister Naveen Patnaik's intervention, the organisation urged him to directly look into the matter, thereby ensuring a normal life with full dignity to Dalit people in the State as per the provisions in the Constitution.

Deccan Herald

Quota seats to go up under new admission norms, says minister

http://www.deccanherald.com/content/375431/quota-seats-go-up-admission.html

Medical Education Minister Sharan Prakash R Patil on Wednesdaydefended the State government's move to implement the provisions of the Karnataka Professional Educational Institutions (Regulation of Admission and Determination of Fee) Act, 2006, stating that it enhanced the quota of seats reserved for SC/ST and OBC students in private engineering, medical and dental colleges.


Addressing a press conference here on Wednesday, Patil said the provisions of the Act mandates that all private professional colleges are scrutinised by the Fee Fixation Committee and Admission Monitoring Committee, each headed by a retired High Court judge, thus ensuring transparency. Section 9 of the Act also makes it mandatory for all unaided non-minority institutions to reserve 50 per cent seats for SC/ST/OBC students.


"The provisions of the Act bring more seats in private colleges under the reserved quota for SC/ST/OBC students thus ensuring social justice," he said.


To illustrate his point, the minister gave an example. At present, seats in private medical colleges are shared in the ratio of 40:60 with 40 per cent in government quota. Fifty per cent seats under this quota are reserved (there is no reservation in management quota) – that is, out of a total of 100 seats, only 20 seats hitherto were reserved for SC/ST/OBCs. The provisions of the 2006 Act enhance this quota to 50 of the total 100 seats.

Patil said all private colleges, including those with a deemed status, would have to follow the reservation norm.


Replying to queries regarding fees shooting up from the next academic year, he said the fees claimed by private colleges would be scrutinised by the Fee Fixation Committee. "The fee can be fixed only upon the approval of the committee. Factors for determination of fee are incorporated in the Act and it cannot be fixed arbitrarily.

It will have to depend on the nature of the professional courses, available infrastructure, expenditure on administration and maintenance," Patil said.


He said profiteering by colleges would not be allowed and the Act had provisions to impose penalties up to Rs 10 lakh against the managements of such colleges. At present, fee in professional colleges is fixed, which is different for government quota seats and management quota seats. He said the government would continue to reimburse the fees of SC/ST/Category-1 students.

The New India Express

Population Growth of SC/ST Higher

http://www.newindianexpress.com/states/odisha/Population-Growth-of-SCST-Higher/2013/12/19/article1953379.ece

The growth rate of Schedule Caste (SC) and Schedule Tribe (ST) population during 2001-11 has been higher than overall population growth of the State.

Director, Census Operations of Odisha Bishnupada Sethi said the growth rate of SC and ST during 2001-11 was 18.2 per cent and 17.7 per cent respectively.

He was speaking at a data dissemination workshop organised by the Directorate of Census Operations.

The two-day workshop focused on the Primary Census Abstract (PCA) of the entire population, the SC and ST, slum and age data figures.

Sethi said the sex ratio of Odisha is 979 females for 1000 males whereas for SC it is 987 and ST it is 1029.

While sex ratio in child population (0-6 years age) has declined from 953 in 2001 to 941 in Census 2011, for STs, it has increased from 979 in 2001 to 980 in 2011.

Similarly, the sex ratio of slum population was recorded to be 948 during the latest census.

The number of slums in the States have risen and spread across 76 urban local bodies (ULB) as compared to 57 ULBs in Census 2001. The literacy rate amongst the slum population at 78.9 per cent is higher than that of the State which is 72.9 per cent.

The Hindu

Police file FIR against former CMC Commissioner, ex-AEE

http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-karnataka/police-file-fir-against-former-cmc-commissioner-exaee/article5476603.ece

The issue of alleged irregularities in spending 22.75 per cent of funds reserved for welfare schemes for Scheduled Castes and Scheduled Tribes in the Raichur City Municipal Council (CMC) between 2008 and 2011, took a new turn on Tuesday night with the Sadar Bazaar police filing a first information report against Tippesh, former CMC Commissioner, and Mallikarjun Gopshetty, former Assistant Executive Engineer.

According to the FIR, the accused have been charged under Sections 409 and 420 of the Indian Penal Code.

It followed a formal complaint filed by M. Basappa, CMC Commissioner. In his order dated November 5, Deputy Commissioner S.N. Nagaraju had instructed CMC Commissioner Basappa to book criminal cases against Mr. Tippesh, Gururaj, office manager; Gopalkrishna, accounts superintendent; Jadav, first division clerk, and Vishapratap Alexander, assistant clerk. However, he had dropped the name of Mr. Gopshetty, who was earlier indicted in the inquiry report by Additional Director-General of Police (ADGP), Directorate of Civil Rights Enforcement (CRED), Bangalore. Taking serious exception to the Deputy Commissioner's order, members of Raichur Vikasa Parishat and other Dalit organisations staged several protests.

They had announced that they would lay siege to the CMC complex on Wednesday and demand that criminal case be registered against Mr. Gopshetty for his alleged involvement.

However, following the registration of the FIR, they withdrew their proposed stir.

"It is a victory for our consistent and uncompromising struggle. As the FIR has been registered against the main accused, we have withdrawn our proposed agitation," Ambanna Arolikar, one of the Dalit leaders, said.

'It is a victory for our consistent and uncompromising struggle'

News Monitor by Girish Pant

.Arun Khote

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Dalits Media Watch Team

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