Wednesday, April 22, 2015

ग्राम प्रधान त ग्राम प्रधान कैक हूंद काका बाडा नि हूंद

 ग्राम प्रधान त ग्राम प्रधान कैक हूंद काका बाडा नि हूंद 

                        चबोड़्या स्किट संकलन :::   भीष्म कुकरेती 
[स्थान -ग्राम प्रधान की तिबारी , द्वी चमचा रौंपलु अर भौंपलु गहन चिंता मा बैठ्याँ छन ]
ग्राम प्रधान - ये निर्भाग्युं ! कुछ स्वाचो , कुछ स्वाचो कि द्वी सौ नेताओं कुण चिट्ठी कनै लिखण जाँसे यूँ नेताओं तै पता चल जावो कि नारायण  प्रधान बि क्वी प्रधान च ?
रौंपलु-सुचणो काम तो म्यार नी च।  आप ब्वालो तो मि धरती फाड़ द्यूं , गंगा जी मा फाळ मार द्यूं !
  भौंपलु- सुचणो काम तो आपक च।  आप हुकम द्याओ मि कैक मवासी घाम लगै द्योलु। 
प्रधान - हाँ चिंता तो मीन इ करण कि द्वी सौ चिट्ठी कनकैक लिखण ?
[घ्याळ दाक प्रवेश ]
प्रधान - मीम समय नी च।  काम बता काम बता ?
घ्याळ दा -अब काम क्या बताउं ?कुछ समज मा नी आणु च। 
प्रधान -अरे प्रधानम तू ऐ अर बुलणु छे कि काम क्या बतौं ?
घ्याळ दा -इन च रै बेटा नारायण कि -
प्रधान -द्याखो मि अब नारायण नि छौं। 
घ्याळ दा -हैं ? ये नाम बदल याल क्या ?
प्रधान -मि ना तो तुम्हारा बेटा हूँ अर ना ही नारायण। 
घ्याळ दा -अरे मि त्यार काका नि छौं ?
प्रधान -नहीं। 
घ्याळ दा -हैं ? अब तू नारायण बि नि छै ?
प्रधान -ना ना। 
घ्याळ दा -हैं ? इन कन ह्वे सकुद 
प्रधान -किलै नि ह्वे सकुद ?
रौंपलु - अब यी ग्राम प्रधान छन। 
घ्याळ दा -कनो ग्राम प्रधान मनिख नि हूंद ? नाता रिस्ता नि हूंदन ?
भौंपलु - नही ग्राम प्रधान केवल ग्राम प्रधान हूंदन। ग्राम प्रधान एक रिस्ताहीन बस्ता हूंद। 
घ्याळ दा -अर जब ये नारायण तै बोटुं जरूरत छे तो येन खुट मा पोडिक बोल छौ - ये घ्याळ काका तू इ म्यार छूट बुबा छे।  तब मि छुट बुबा छौ अर अब मि काका बि नि छौं ?
प्रधान -अरे तो एक बोत का बदल अपण कूड़ी पुंगड़ी त्यार नाम कर द्यूं क्या ?
घ्याळ दा -मतबल तू अब नारायण नि छै ?
प्रधान -नही।  
रौंपलु - अब यी केवल ग्राम प्रधान छन। ग्राम प्रधान रिस्ताहीन स्याही , रिस्ताहीन रबर स्टैम्प हूंद। 
घ्याळ दा -अब तू नारयण बि नि छे ?
भौंपलु - अब यी केवल बस प्रधान छन। 
घ्याळ दा -मतलब अब मि त्यार काका बि नि छौं ?
प्रधान -ब्वाल त च कि मि अब कैक भतीजो नि छौं। 
रौंपलु - अब यी प्रजातंत्र का खंबा छन बस। 
घ्याळ दा -ठीक च तो मि अफिक ब्वारि तै लेक हस्पताल लिजांद। 
प्रधान - तो ली जा कैन रोक ? हस्पताल लीजा या मड़घट लीजा।  मि तै क्या पड़ीं च। 
रौंपळु - घ्याळ दा ! कैक ब्वारी तै अस्पताल लिजाण ?
घ्याळ दा - तै नारयणै ब्वारि तैं।  ब्वारी  भ्यूंळौ डाळ बिटेन लमडी गेन ।  पर अब जब स्यु नारायण इ नी च तो मी इ ब्वारी तै अस्पताल लिजांदु। 

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