-
लोकतंत्र का ध्वजारोहण
विद्या भूषण रावत
बिहार में रोहताश जिले में स्वतंत्रता दिवस के दिन दलितों द्वारा झंडा फहराने के विरोध में ऊंची नाक मूंछ वाले हिन्दुओ ने जो तांडव किया वो निंदनीय है. उनकी गोलाबारी में एक व्यक्ति मारा गया और एक दर्जन घायल हो गए. ऐसा बताया गया है के गाँव समाज की जमीन पर इलाके के राजपूत हर वर्ष ध्वजारोहण करते थे और इस बार भी करना चहिते थे लेकिन दलितों ने इस बार रविदास मंदिर के आगे ध्वजारोहण करनी की सोची तो प्रतिक्रियावस हिंसा में उन्हें अपनी जान से भी खेलना पड़ा.
वैसे इस प्रकार की घटना न तो पहली है और ना ही यह आखिरी होगी क्योंकि भारत में दलितों को हर स्थान पर तिरंगा फहराने पर हिंसा का शिकार होना पड़ता है. तमिलनाडु में तो मदुरै के पास कई वर्षो से दलित सरपंच झंडा नहीं फहरा सकते। वैसे १५ अगस्त को मसूरी में जो हुआ वो देखकर तो मज़ा आ गया. भाजपा के विधायक और मसूरी नगरपालिका के अध्यक्ष के बीच झंडा फहराने को लेकर हाथाम्पाई हो गयी और इसका फायदा लेकर एक बच्चे ने ध्वजारोहण कर दिया।
अब दिल्ली की सल्तनत का हाल देखिये। मनमोहन सिंह को झंडा लहराते और फहराते १० साल होगये और नरेन्द्र मोदी बेहद ही परेशान हो रहे हैं इसलिए उन्होंने सोचा चाहे लालकिले में मौका मिले या न मिले मैं तो लालन कालेज में झंडा फहराउन्गा और फिर उन्होंने प्रधानमंत्री को चुनौती दी के हिम्मत है तो उनके साथ बहस करके देखे। इसे मोदी की खिसियाहट के अलावा कुछ नहीं कह सकते क्योंकि अहमदाबाद से लालकिले की दूरी बहुत ज्यादा है और रस्ते में उत्तर प्रदेश भी पड़ता है इसलिए कम से कम प्रधानमंत्री को ललकार तो सकते हैं अगर हटा नहीं सकते तो ?
हमें भारत और इस उप महाद्वीप के लोगो की मानसिकता को समझना होगा। स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराना भारत के अमर शहीदों या नेताओं को याद करने की फॉर्मेलिटी नहीं है अपितु शहर में, देश में, प्रदेश में, गाँव में अपनी चौधराहट थोपने की लड़ाई भी है और यही कारण है हर एक नेता लालकिले पर झंडा फहराने का सपना देखता है और वोह भारत ही नहीं पाकिस्तान में और बांग्लादेश में भी मौजूद हैं जो इस सपने को बेचते हैं और नतीजा हमारे सामने है.
गाँव में एक दलित कैसे गाँव का चौधरी हो सकता है यदि गाँव के 'बड़े' चौधरी जिन्दा हैं तो ? जातिवादी दम्भी तो यही सोचते हैं के क्या हमारा संविधान हमारी 'परम्पराओं' से बड़ा हो सकता है ? वे तो साफ़ कहते हैं, 'अरे भाई, संविधान तो बनता बिगड़ता रहता है मनुस्मृति तो एक बार बनी तो सबके दिमाग में घुस गयी और न कोई संशोधन और न ही उसमे संशोधन की कोई मांग सुनाई दे रही है इसलिए 'भगवान' के बनाये कानून से ही तो समाज चलता है और तभी तो वह 'चल' रहा है. सरकारी कानूनों से समाज टूटता है और यह तो ऐसे लोगो को 'सर' पे बैठा देता है जो पैरो के नीचे रहने के आदि थे. हमारी व्यवस्था इसलिए तो टूट रही है.
अब व्यवस्था तो टूटेगी और चौधरियों को जनता के आगे झुकना पड़ेगा ही क्योंकि लोकतंत्र किसी को दबा के कभी चल नहीं सकता और अब कोई चुप नहीं रह सकता ऐसे अत्याचारों पर. पार्टियों और नेताओं के क्या कहने वोह तो बोलने में कतराते हैं और इसे ही 'लोकतंत्र' की 'ताकत' कहते हैं जब नेताओ को बोलना होता है तो वो चुप रहते हैं और बिहार के 'क्रन्तिकारी' नेता और 'समाजवाद' और 'सामाजिक न्याय' के सारे महारथी चुप हैं क्योंकि लोकतंत्र तो 'वोट' हैं न इसलिए मोदी के सारे अपराध वोटो की 'गंगा' में धुल जाते हैं. इसलिए झंडे के लिए इतना संघर्ष है ताकि गरीबो को कुचल सको और अपनी चौधराहट कायम कर सको.
क्या लोकतंत्र में ऐसे चोधराहटपूर्ण ध्वजारोहण यह जाहिर नहीं करते के यह परम्परा अभी भी सामंती है क्योंकि केवल 'नामी' 'गिरामी व्यक्ति ही ध्वजारोहण करेंगे और वे हमारे ,भूत, वर्तमान, या भविष्य के 'कुछ न कुछ' हैं. क्या कोई अनाम व्यक्ति झंडा नहीं फहरा सकता। क्या हम सब अपने अपने घरो पर झंडा फहरा कर और एक दुसरे को गले लगाकर स्वाधीनता दिवस या गणतंत्र दिवस नहीं मना सकते। हमारे रास्ट्रीय पर्वो को मनाने के लिए या झंडा फहराने के लिए एक चौधरी की क्यों जरुरत है? क्या हम इस अन्य त्योहारों की तरह अपने अपने घरो पर रौशनी करके और प्यार से नहीं मना सकते। जब तक ध्वजारोहण हमारे समाज में अपने वर्चस्व और राजनैतिक ताकत का प्रतीक बना रहेगा यह सच्चे मायने में लोकतंत्र का ध्वजारोहण नहीं कहलाया जा सकता और हर साल ऐसे वाकये होते रहेंगे जिसमे निर्दोष लोगो की जान जाती रहेगी क्योंकि झंडा फहराना हमारी सामंतशाही की ताकत का प्रतीक बन चूका है जिसे चुनौती देने के मतलब मौत को निमंत्रण देना हैं क्योंकि इस देश में कानून अभी भी 'इश्वर' के 'संविधान' का चल रहा है. सछ लोकतंत्र उस दिन आएगा जब आंबेडकर का संविधान हमारे दिलो और समाज के नियमो के ऊपर राज करेगा और तभी झंडे को लेकर बर्चस्व की लड़ाई नहीं होगी और तब कोई भी अपने आप ध्वजारोहण कर पायेगा बिना किसी भय या राग द्वेष के और तभी इस देश में सच्ची आज़ादी होगी।
Unique
My Blog List
HITS
Monday, August 19, 2013
लोकतंत्र का ध्वजारोहण विद्या भूषण रावत
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Census 2010
Followers
Blog Archive
-
▼
2013
(5604)
-
▼
August
(725)
- विनाश के मुहाने पर सीरिया
- Real face of police torture in India
- अब छात्र आंदोलन का मौका नहीं कामरेडों को
- कोलकाता में रिलायंस और एअरटेल को एक रुपये के टोकन ...
- तीन साल के अंतराल के बाद फिर दूरदर्शन पर विद्रोही ...
- महाज्ञानी मार्क्सवादियों से महामूर्ख दुसाध क्षमा म...
- पढ़ें भड़ास,छंटनी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर ये सार...
- बिना प्रतिरोध आत्मसमर्पित यह देश डालर राज का युद्ध...
- 8000 से अधिक भारतीय मंगलग्रह की एकतरफा यात्रा के ल...
- Jaitley urges BJP to announce PM candidate without...
- Making laws to empower women not enough, need to s...
- Govt mulling Rs 5 a litre hike in diesel prices as...
- Fwd: CC News Letter 30 August - British Parliament...
- Fwd: [pmarc] Dalits in media feel the sting of cas...
- Fwd: [Marxistindia] Sitaram Writes to Narayanasamy
- Fwd: [pmarc] Dalits Media Watch - News Updates 31....
- জ্ালানিতে ভর্তুকি নয়
- অধিগ্রহণে লাগবে সময়
- পূরোনো কাসুন্দি
- সিরিয়া াক্রমণে পাশে নেই ব্রিটেন
- গুরুর মহিমা
- আগাম ভোট চায় বিজেপি
- হাসি মুখে জলযাত্রা
- সংঘাতে প্রোমোটার তৃমূল
- রক্তপরীক্ষায় লাগবে সচিত্র পরিচয়পত্র
- পন্চায়েত দফ্তর নুতন ভবনে,সুব্রতর নারায়ণপুজা
- দেব তুমি রংবাজী করো,দিদি দেখছেন
- ভোটের যাত্রাপথ
- মনমোহনী গর্জনে স্তম্ভিত সংসদ
- দুয়ারে মমতা এলে খিল দেবে মোর্চা
- दीदी की बेलुड़ यात्रा के बाद दक्षिणेश्वर में बन रह...
- Why Mamata Banerjee is shifting chief minister's o...
- हवा हवाई है माकपा की सांगठनिक कवायद
- বিড়াল হত্যার দায় হাজতবাস
- ১.৮৩ লক্ষ কোটির বিনিয়োগ প্রকল্পে মঞ্জুরি
- রিজার্ভ ব্যাঙ্কের ঘোষণায় টাকা উঠল ২২৫ পয়সা
- সন্ত্রাস বন্ধ হবে না, জেরায় ভাটকল
- মুক্ত নীতিই বহাল মনমোহনের
- খাদ্যের পর জমি যুদ্ধেও জয় শাসকের
- মুক্তির পথ না সর্বনাশের
- ভাটকল থেকে কলকাতা
- জনপ্রিয় শিল্পনীতি মমতার
- লোকসভায় পাশ জমি অধিগ্রহণ বিল
- কলকাতার টিপছাপেই রহস্যভেদ
- हवा हवाई है माकपा की सांगठनिक कवायद
- हमसे तो सुअर स्वजन भले India Inc says immediate st...
- Fwd: (हस्तक्षेप.कॉम) हर बड़ी मछली खुद को मगरमच्छ स...
- Fwd: [pmarc] Dalits Media Watch - News Updates 30....
- दीदी लाख कोशिश कर रही हैं, लेकिन बंगाल में उद्योग ...
- सबकुछ मंहगा,रुपया गिरा,सोना उछला तो क्या,उपभोक्ता ...
- মণিপুরে অনুপ্রবেশ মায়ানমার সেনার
- মেয়েকে গণধর্ষণ, স্ত্রীকে খুন--ন্যায় বিচারের আশায় স...
- সংসদে অভব্যতার অভিযোগ কল্যাণের বিরুদ্ধে
- আশ্বাস দিলেন না প্রাধানমন্ত্রীও
- हजारों आदिवासियों ने किया माता मरियम के आदिवासी रू...
- एक छोटी सी खबर से उठते इन सवालों को मैं यहाँ इसलिय...
- नवसाम्राज्यवाद, विदेश मोह और लेखक
- Fwd: [initiative-india] New Land Acquisition Bill ...
- Fwd: CC News Letter 29 August - US-NATO Campaign T...
- Fwd: short film festival
- बंद कल कारखानों की जमीन पर लगेंगे नये उद्योग,पैमाइ...
- আশ্চর্য্য মঙ্গল ভ্রমণ
- সিরিয়া সঙ্কটে পতনের রেকর্ড টাকার
- असली चाल,अबाधित विदेशी पूंजी के लिए करों में राहत ...
- अब छात्र आंदोलन का मौका नहीं कामरेडों को।
- तर्कशीलता की मशाल
- भाषाओं का विस्थापन
- आर्थिक संकट के लिए घरेलू कारक जिम्मेदार : प्रधानमं...
- इस तरह की पूंजी अस्थिर होती है और कभी भी बाहर जा स...
- Fwd: Save RTI : Act Now, Call The Speaker
- विधाननगर,केशपुर और चंद्रकोमा में बाढ़ का संकट गहराया
- Fwd: (हस्तक्षेप.कॉम) जहां लहू का सुराग़ और असली क़...
- Fwd: Who Killed Dabholkar? ISP V August 2013
- रुपये को किसान और आदिवासी ही संभाल सकते हैं , जो प...
- हमारी सारी माय्थोलोजी में ये आदिवासी खलनायक की तरह...
- एनडीटीवी, आउटलुक, नेटवर्क18, भास्कर के बाद अब ब्लू...
- मजीठिया वेतनमान क्यों जरूरी?
- कैंसर से लड़ रहे वीरेन डंगवाल का आपरेशन सफल
- हावड़ा में यातायात सुधारने पर जोर, मंदिरतला जायेगी...
- छात्रों को होलटाइमर बनायेंगी दीदी
- शिक्षकों की निगरानी से बाहर हमारे बच्चों की दुनिया...
- Bamcef Unification General Body Meeting at Babasah...
- कुएं में गिरा रुपया,बचाव राहत लाइव चिदंबरम दोषी ठह...
- Navbharat Times Online बिहार के मुजफ्फरपुर से जेडी...
- ibnlive.com How the rupee fall will impact you, fi...
- Uday Prakash सरकार ने फेसबुक के साढ़े तीन हज़ार के ल...
- जल महानगर में तब्दील कोलकाता हावड़ा और विधाननगर,के...
- টাকা ৬৮ তে, ৩৪ হাজারে সোনাও
- সোনা ৩৩ হাজার, ছুঁতে পারে ৩৫ হাজার
- আরও সংস্কারের ডাক চিদম্বরমের
- আর্থিক ঘাটতি নিয়ে হুঁশিয়ারি দিল ফিচ, ডিজেলের এককাল...
- সেনা অভিযানের শঙ্কায় ৬৬ টাকা পার হল ডলার
- অক্টোবরে বাড়তে চলেছে রেলের পণ্যমাসুল
- ১.৮৩ লক্ষ কোটির বিনিয়োগ প্রকল্পে মঞ্জুরি
- पत्रकारिता की सारी खबरें पढ़े भड़ास
- नागरिक जीवन की यह अनंत नरकगाथा
- Fwd: Its Not Rahul vs Modi, It's Rahul vs The Cong...
- फिरभी रुपया गिरा क्यों भाई खाद्य सुरक्षा परोस दी थ...
- Fwd: (हस्तक्षेप.कॉम) भारतीय प्रजातन्त्र पर हमला है...
- Yashwant Singh जब मैं भड़ास4मीडिया वेबसाइट शुरू कर...
-
▼
August
(725)
No comments:
Post a Comment